लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और पहले चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार पूरे चरम पर है। ऐसे में नेता अपनी सुरक्षा और मतदाताओं पर प्रभाव जमाने के लिए बाउंसर्स और पहलवानों की खूब सेवाएं ले रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में ये चलन कुछ ज्यादा ही है। द इंडियन एक्सप्रेस में छपे कूमी कपूर के एक लेख के अनुसार, नेताओं द्वारा बाउंसर्स और पहलवानों को एसपीजी जवानों जैसा लुक दिया जा रहा है और उन्हें काले रंग की वर्दी में देखा जा रहा है, ताकि ये पहलवान या बाउंसर्स पीएम की सुरक्षा में तैनात एसपीजी जवानों की तरह दिखाई दें। भीड़ के बीच निकलने के दौरान ये बाउंसर्स जहां नेताओं की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, वहीं कुछ मामलों में इन बाउंसर्स का इस्तेमाल मतदाताओं को हड़काने में भी किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने इस पर चिंता जाहिर की है। इसके बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली के जिम संचालकों को एक सर्कुलर जारी किया है। इस सर्कुलर के मुताबिक जिम संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके बॉडी बिल्डर किसी नेता के साथ भीड़-भाड़ वाले इलाके में हथियार के साथ ना जाएं। साथ ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली के 580 जिम मालिकों के साथ बैठक की और उनके स्टाफ द्वारा किसी भी तरह के शांति भंग के प्रयास के प्रति आगाह किया। गौरतलब है कि चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के बाद नेताओं की सुरक्षा हटा ली जाती है। जिसके चलते नेताओं द्वारा चुनाव के दौरान बाउंसर्स और पहलवानों की काफी मांग होती है। ये पहलवान नेता के साथ चुनावी दौरे करते हैं। इन पहलवानों को पैसा भी अच्छा खासा दिया जाता है।
खबरों की मानें तो कुछ बाउंसर्स को प्रति दिन 5000 रुपए तक मिलते हैं। वहीं कुछ नेता इन बाउंसर्स के खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम रखते हैं। जिम बाउंसर्स के साथ ही निजी सुरक्षा एजेंसियों की भी चुनावों के मौसम में खूब चांदी होती है। विभिन्न पार्टी नेताओं द्वारा इन एजेंसियों की मदद ली जाती है।

