यूजीसी अपने नए नियम की वजह से चर्चा में है। यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया रेगुलेशन लागू किया और इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। नए रेगुलेशन का नाम ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ है। यूजीसी के इस नियम के बाद जनरल कैटेगरी का समाज नाराज बताया जा रहा है। जनरल कैटेगरी बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है। बीजेपी के भी कई नेता इसको लेकर असमंजस में हैं। बीजेपी के दिग्गज नेता बृजभूषण शरण सिंह के विधायक बेटे प्रतीक भूषण ने बिना नाम लिए यूजीसी के नए रेगुलेशन का विरोध किया है।
प्रतीक भूषण ने क्या कहा?
प्रतीक भूषण ने X पर एक पोस्ट में कहा, “इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिन्हित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है।”
राकेश टिकैत ने भी किया विरोध
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी UGC कानून का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इससे समुदायों में दुश्मनी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यूजीसी का नया एक्ट एससी-एसटी की तरह है और अब ओबीसी के लोग भी मुकदमा लिखवा सकेंगे। राकेश टिकैत ने कहा कि जो पंडित जी, ठाकुर लोग हैं उन्हीं के खिलाफ मुकदमे होंगे। अब यह सरकार चाहती है कि देश धर्म और जातिवाद में बंटा रहे और मुकदमे चलते रहे।
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बीजेपी विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने भी की समीक्षा की मांग
वहीं बिठूर से बीजेपी विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने भी यूजीसी के नए एक्ट का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इस कानून की सरकार को समीक्षा करनी चाहिए और सबकी सुरक्षा को सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि समाज को न्याय मिल सके।
निशिकांत दुबे ने किया बचाव
वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “मोदी है तो मुमकिन है। विश्वास रखिए UGC नोटिफिकेशन की सभी भ्रान्तियों को दूर किया जाएगा। संविधान को आर्टिकलों 14 एवं 15 के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग में कोई फर्क नहीं है। 10 प्रतिशत आरक्षण सामान्य वर्ग को केवल और केवल माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के कारण मिला। 1990 मंडल कमीशन लागू होने के बाद इस देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने सरकार बनाई, लेकिन न्याय केवल मोदी जी ने दिया। इंतज़ार कीजिए UGC की भ्रांतियां भी ख़त्म होगी।” पढ़ें UGC रेगुलेशन का क्या है मुद्दा?
