कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने गुरुवार (17 अगस्त) को कहा कि शरद यादव के नेतृत्व वाला धड़ा ही ‘असली’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जनता दल (युनाइटेड) है, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला धड़ा पूरी तरह से भाजपा से मिला हुआ है। आजाद ने शरद यादव की ओर से बुलाए गए ‘साझा संस्कृति बचाओ’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए जद (यू) के वरिष्ठ बगावती नेता को धर्मनिरपेक्षता का मार्ग चुनने और नीतीश कुमार से अलग राह बनाने के लिए बधाई दी।

आजाद ने कहा, “शरद यादव के नेतृत्व वाला धड़ा ही असली है, जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला धड़ा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का जद (यू) है।” उन्होंने कहा, “हमें बिहार में अब जद (यू) का विकास नहीं दिख रहा, क्योंकि यह पूरी तरह से भाजपा में मिल चुका है।” आजाद ने शरद यादव की भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में जगह स्वीकार नहीं करने के फैसले की भी सराहना की। आजाद ने कहा, “वह (शरद यादव) अपने सिद्धांतों पर अड़े रहे और उन्होंने मंत्रिमंडल में पेश किए गए पद को स्वीकार नहीं किया।”

नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस को मिलाकर बने महागठबंधन की सरकार से इस्तीफा दे दिया था और एक दिन बाद ही भाजपा के सहयोग से नई सरकार का गठन किया। इस कदम का शरद यादव ने विरोध किया था, जिसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई। इसके बाद जद (यू) ने राज्यसभा सांसद अली अनवर को निलंबित कर दिया और शरद यादव को राज्यसभा में पार्टी के नेता के पद से हटा दिया।

इतना ही नहीं शरद यादव के खास माने जाने वाले पार्टी महासचिव अरुण श्रीवास्तव पर नीतीश गुट ने सबसे पहले 8 अगस्त को वार किया था। उन्हें पार्टी महासचिव पद से हटा दिया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। गुजरात राज्य सभा चुनाव में जदयू के एकमात्र विधायक छोटू भाई वसावा ने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट किया था, इसी वजह से पटेल की जीत हो सकी थी। इससे खफा पार्टी नेतृत्व ने पार्टी महासचिव अरुण श्रीवास्तव को यह कहते हुए पद से हटा दिया था कि उन्होंने पार्टी के फैसले से विधायक को सही तरीके से अवगत नहीं कराया।