बिहार के मुजफ्फरपुर में भू-माफियाओं द्वारा सरकारी अस्पताल को बेचने का मामला सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। कहा जा रहा है कि जिस जमीन पर पिछले चार दशक से अस्पताल बना था, उस जमीन को ही बेच दिया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब जमीन से जुड़े दस्तावेज अप्रूवल के लिए सर्किल अधिकारी के पास पहुंचे। फिलहाल दस्तावेजों के अप्रूवल पर रोक लगा दी गई है। इस घटना के बाद गांव के लोग काफी परेशान हो गए हैं और इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपील की है कि अस्पताल को बंद न किया जाए क्योंकि उनके पास इलाज के लिए आस-पास कोई भी सुविधा मौजूद नहीं है।
यह मामला मुजफ्फरपुर के मुरौल गांव का है, जहां 1975 में एक अस्पताल का निर्माण किया गया था। अस्पताल के लिए गोपाल शरण सिंह नाम के एक शख्स ने करीब एक एकड़ी जमीन सरकार को दान में दी थी। जिस जमीन पर ये स्वास्थ्य उपकेंद्र चल रहा है उसके 36 डेसीमल की बिक्री इस साल फरवरी में कर दी गई। जमीन को खरीदने वाले स्वास्थ्य केंद्र पर कब्जा करने की कोशिश में हैं। इस सिलसिले में जमीन से संबंधित दस्तावेज कुडनी सर्किल अधिकारी के पास पहुंचे तो इसकी जांच अंचलाधिकारी पंकज कुमार से करवाई गई। तब पता चला कि इस जमीन पर स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है।
मामले की जानकारी देते हुए पंकज कुमार ने बताया, ”भू-माफिया द्वारा सरकारी स्वास्थ्य सुविधा को बेचने की पूरी घटना सामने आई है। हम सभी एंगल से मामले की जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यहां एक प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था और हमने अप्रूवल की प्रक्रिया को रोकने का आदेश दिया है।”
अंचल में इस भूमि से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पीएससी अधिकारी अंचलाधिकारी से इस संबंध में दस्तावेज की मांग कर रहे हैं कि साल 1975 के बाद से स्वास्थ्य विभाग ने जमीन की जमाबंदी क्यों नहीं करवाई, किस आधार पर जमीन पर स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण किया गया। सवाल ये भी है कि किसी साजिश के तहत भूमि से संबंधित अभिलेख को गायब तो नहीं करवा दिया गया।
बता दें कि बिहार में सरकारी बाबूओं की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के और भी कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले पूरे रेलवे इंजन को बेचने और उसके कुछ ही दिनों बाद पुल को बेचने की बात सामने आई थी।
