बिहार में चमकी बुखार (इन्सेफेलाइटिस) से लगभग 150 बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की लगातार हो रही मौतों पर बिहार सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों को समय पर इलाज न मिलना और अस्पताल की लाचार व्यवस्था सवालों से सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सवालों के घेरे में हैं। बच्चों की मौत पर उनसे शुक्रवार को सवाल पूछे गए तो उन्होंने एकबार फिर चुप्पी साध ली।
दरअसल सीएम नीतीश लू प्रभावित जिलों के दौरे पर हैं। शुक्रवार (21 जून 2019) को गया के एक एक अस्पताल में लू से प्रभावित मरीजों से मिलने के बाद जब नीतीश अस्पताल परिसर से बाहर निकल रहे थे तो उन्हें पत्रकारों ने घेर लिया। इस दौरान पत्रकारों ने उनपर सवालों की बौछार कर दी। सवालों की बौछार के बीच सीएम मुस्कुराए और फिर अपनी कार में बैठ वहां से चल दिए।
इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि पत्रकारों से घिरे नीतीश किस तरह बिना कोई शब्द बोले चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट के साथ सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। चमकी बुखार से मौतों पर सवाल कर रहे पत्रकारों को सीएम ने एकबार फिर नजरअंदाज किया। लेकिन पत्रकार उनपर एक के बाद एक सवाल दागते हुए उनकी कार के करीब जा पहुंचे। पत्रकारों ने कहा- बच्चे अस्पताल में मर रहे हैं मुख्यमंत्री जी…160 बच्चों की मौत हो चुकी है और इसके आरोप आप पर लग रहे हैं। आपको इसपर बोलना होगा।
#WATCH Bihar: Chief Minister Nitish Kumar evades questions of journalists as they ask him about the deaths of children in the state due to Acute Encephalitis Syndrome (AES). pic.twitter.com/37cQrlOskB
— ANI (@ANI) June 21, 2019
इससे पहले बुधवार (19 जून, 2019) को दिल्ली में पीएम मोदी द्वारा बुलाई सर्वदलीय बैठक के बाद संसद भवन से निकले थे तो तब भी उन्होंने पत्रकारों के सवालों पर एक शब्द नहीं बोला था। बार-बार टोकने पर भी सीएम ने जवाब नहीं दिया था। उन्होंने गाड़ी में बैठते ही शीशा चढ़ा लिया और ड्राइवर से गाड़ी की रफ्तार तेज करवा वहां से निकल लिए थे।
बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर में इन्सेफेलाइटिस से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। जिले के श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एचकेएमसीएच) में सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। नीतीश ने इस अस्पातल का इस हफ्ते दौरा भी किया था जहां पर उन्हें जमकर विरोध का सामना करना पड़ा था। इस दौरान अस्पताल परिसर में लोग उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

