बिहार सरकार की ओर से राज्य के 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग लोगों को उनके घर पर ही जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री सुविधा मुहैया कराई जाएगी। अब उन्हें भू राजस्व विभाग कार्यालय या निबंधन विभाग अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को यह ऐलान एक्स पर किया है।
मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि कई बार यह देखा गया है कि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री से जुड़े कामों के लिए बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इसी कारण उन्हें उम्र के हिसाब से सहूलियत देने और अन्य परेशानियों से छुटकारा दिलाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
कब लागू होगी यह व्यवस्था?
यह सुविधा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की ओर से संचालित मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए एक निश्चित समय-सीमा के भीतर मुहैया कराई जाएगी, जिसमें आवेदक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यह नई व्यवस्था एक अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी।
ऐसे मिलेगी भूमि से जुड़ी ताजा जानकारी
उन्होंने कहा कि जमीन खरीदने के इच्छुक लोगों को कई बार उस भूमि से जुड़ी ताजा जानकारी नहीं मिल पाती। इसे ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री से पूर्व भूमि की ताजा स्थिति की जानकारी खरीदने वाले और बेचने वाले दोनों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। इसके तहत आवेदकों के अनुरोध पर निबंधन विभाग अंचल कार्यालय से भूमि की ताजा स्थिति की जानकारी प्राप्त कर खरीदने वाले व्यक्ति को उपलब्ध कराएगा। इससे जमीन के बारे में सही और प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार बनने के बाद ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रमों को लागू किया गया है, इनका उद्देश्य बिहार को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की कैटेगरी में शामिल करना है। ‘सात निश्चय-3’ के तहत सातवां निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (ईज ऑफ लिविंग) है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के रोजमर्रा जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करके आसान बनाना है।
लोगों से मांगे सुझाव
उन्होंने भरोसा जताया कि यह पहल राज्य के 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। साथ ही भूमि की ताजा जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था से सभी नागरिकों को लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था के संबंध में कोई अहम सुझाव देने के इच्छुक लोग 19 जनवरी 2026 तक अपने सुझाव निर्धारित माध्यमों के जरिए भेज सकते हैं।
(इनपुट- पीटीआई)
