बिहार के लालगंज पुलिस स्टेशन के दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ छापेमारी के दौरान गबन के आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। लालगंज एसएचओ संतोष कुमार और सब-इंस्पेक्टर सुमन झा पर पुलिस अभियान के दौरान जब्त की गई कीमती वस्तुओं जिनमें सोना, चांदी और नकदी शामिल हैं, का गबन करने का आरोप है लेकिन इन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। दोनों को निलंबित कर दिया गया है।
यह एफआईआर तिरहुत रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) चंदन कुशवाहा के आदेश पर हुई जांच के बाद दर्ज की गई है। डीआईजी कुशवाहा ने कहा, “प्रारंभिक जांच से अधिकारियों की ओर से अवैध कार्रवाई का संकेत मिलता है जिसके परिणामस्वरूप एफआईआर दर्ज की जाएगी।” उन्होंने कहा कि इस मामले की व्यापक जांच की जाएगी।
पुलिस पर छापेमारी के दौरान बरामद सामान चोरी करने के आरोप
मामला बिलनापुर गांव का है जहां एक कथित चोर के घर पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने चोरी की वस्तुएं जैसे टीवी, बर्तन और कारतूस जब्त किए थे। हालांकि, बाद में यह दावा सामने आया कि कई किलोग्राम सोना, चांदी और बड़ी मात्रा में नकदी सहित अन्य कीमती सामान भी बरामद हुए थे लेकिन उन्हें जब्ती सूची में शामिल नहीं किया गया था।
बिहार: पुलिस ने सोने, नकदी और मूल्यवान वस्तुओं का उल्लेख नहीं किया
विवाद तब शुरू हुआ जब 31 दिसंबर को लालगंज के उपमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) गोपाल मंडल ने इलाके में सक्रिय चोरों के एक गिरोह का भंडाफोड़ करने की घोषणा की। ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने बताया कि रामप्रीत साहनी के घर पर छापेमारी में चोरी का सामान बरामद हुआ। जल्द ही आरोप लगने लगे कि पुलिस ने सोने और नकदी सहित अधिक मूल्यवान वस्तुओं का उल्लेख नहीं किया और बरामद सामान के रूप में केवल बर्तन और टीवी जैसी आम घरेलू वस्तुएं ही पेश कीं।
रामप्रीत के रिश्तेदार गेना लाल साहनी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान घर से लगभग दो किलोग्राम सोना, 6 किलोग्राम चांदी और भारी मात्रा में नकदी बरामद की। उन्होंने और कई ग्रामीणों ने दावा किया कि ये वस्तुएं सरकारी सूची में दर्ज नहीं थीं। आरोपों के बाद, मामले को गहन जांच के लिए भेजा गया और वैशाली के पुलिस अधीक्षक ने एसएचओ कुमार और सब-इंस्पेक्टर झा को निलंबित कर दिया।
