कोरेगांव-भीमा हिंसा के आरोपियों से संबंध रखने और नक्सलवादियों को कथित रूप से समर्थन देने के आरोपी नामकुम निवासी सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी ने अपने को निर्दोष बताया और सरकार पर आलोचनात्मक आवाजों को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग की। महाराष्ट्र के कोरेगांव-भीमा में 31 दिसंबर और पहली जनवरी को हुई हिंसा के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने देश के विभिन्न हिस्सों के साथ रांची के नामकुम में स्टेन स्वामी के निवास पर भी छापेमारी की थी। स्वामी के आवास से पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एवं अन्य दस्तावेज बरामद किये थे। इस दौरान देश के अन्य हिस्सों से महाराष्ट्र पुलिस ने नक्सलवादियों के साथ कथित रूप से संबंध रखने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल पांचों को पुलिस की निगरानी में नरजबंद रखा गया है।
स्टेन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर महाराष्ट्र सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 28 अगस्त को महाराष्ट्र पुलिस के उनके आवास पर पहुंचने तक उन्हें अपने खिलाफ पुणे में प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना नहीं थी।उन्होंने दावा किया कि जब वह पुणे या महाराष्ट्र गये ही नहीं तो वह वहां हुई हिंसा में कैसे शामिल हो सकते हैं।
स्टेन ने आरोप लगाया कि सरकार चर्च एवं मिशनरीज को तथा मानवाधिकार समर्थकों को परेशान कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में सरकार कुल 577 पंजीकृत गैरसरकारी संगठनों में से केवल 88 को परेशान कर रही है क्योंकि उनका संबंध मिशनरीज से है। स्टेन ने सरकार की कार्रवाई की हिंसा करते हुए मांग की कि भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़े सभी मामले वापस लिये जायें और मानवाधिकार आयोग पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल इसकी जांच करे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को छापामार कार्रवाई करने के बाद देश में अलग-अलग जगहों से तेलगू के जाने-माने कवि वरवर राव, कार्यकर्ता वेर्नन गोन्साल्विज, अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और पेशे से वकील सुधा भारद्वाज को माओवादियों के साथ संबंध रखने के संदेह में गिरफ्तार किया था।

