बरेली में पिछले साल हिंसक झड़प हुई थी। इस मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा खान को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं अब एक 35 साल के पूर्व पार्षद और मुख्य गवाह ने 9 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 9 लोगों ने एक कॉन्ट्रैक्ट किलर को हायर करके उन्हें मारने की साजिश रची। पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता मोहम्मद फिरदौस खान ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनसे दुश्मनी इसलिए पाली क्योंकि उसने झड़पों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद की थी और हिंसा में शामिल कई लोगों की पहचान भी की थी। FIR शनिवार को बरेली के बारादरी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई।

पुलिस ने क्या कहा?

रविवार को बरेली पुलिस ने पड़ोसी पीलीभीत जिले के रहने वाले फुरकान को हिरासत में लिया, जिसे कथित तौर पर शिकायतकर्ता को मारने के लिए हायर किया गया था। पुलिस ने बताया कि फुरकान से उन लोगों की पहचान करने के लिए पूछताछ की जा रही है, जिन्होंने कथित तौर पर उसे इस अपराध के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया था। बरेली के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस अनुराग आर्य ने कहा कि फिरदौस द्वारा अपनी शिकायत में लगाए गए आरोप सच लग रहे हैं और फुरकान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिरदौस ने बरेली में 26 सितंबर की हिंसा की जांच के दौरान पुलिस की मदद करने में अहम भूमिका निभाई थी। उसने वीडियो और तस्वीरों के जरिए शामिल आरोपियों की पहचान करने में मदद की थी। अधिकारी ने कहा कि वह इस मामले में गवाहों में से एक भी है। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने बताया कि वह स्थानीय पार्षद अनीस सकलानी के घर के पास रहता है जो इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा का करीबी सहयोगी है। तौकीर रजा और अनीस सकलानी IMC के पदाधिकारी भी हैं। दोनों इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल हैं और फिलहाल जेल में हैं।

बरेली हिंसा: मौलाना तौकीर रजा समेत 38 लोगों के खिलाफ एक और आरोप पत्र दाखिल

फिरदौस खान ने आरोप लगाया कि झड़पों के दौरान उसने प्रशासन और स्थानीय समुदाय को शांति बनाए रखने में मदद की। उसने बताया कि बाद की जांच के दौरान स्थानीय पार्षद अनीस सकलानी और उसके सहयोगियों के नाम सामने आए। पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार अनीस सकलानी सहित आरोपियों को लगा कि उसने पुलिस को उनकी पहचान बताई है और अदालत में उनके खिलाफ गवाही दी है, जिससे उनके मन में उसके प्रति दुश्मनी पैदा हो गई। हालांकि पुलिस ने साफ किया कि फिरदौस का कोई बयान अभी तक अदालत में दर्ज नहीं किया गया है।

10 लाख रुपये की मांग

फिरदौस ने आगे आरोप लगाया कि 18 दिसंबर को कॉर्पोरेटर अनीस सकलानी के बेटे अदनान ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसे रोका, गाली-गलौज की और धमकी दी। उन्होंने कथित तौर पर उस पर अपने नेताओं के जेल में होने का आरोप लगाया और दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के डर से उन्हें अपने घरों से दूर रहना पड़ रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों ने यह भी बताया कि वे कोर्ट की कार्यवाही पर पहले ही 8-10 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। फिरदौस ने आरोप लगाया कि उन्होंने उससे दो दिनों के अंदर 10 लाख रुपये का इंतज़ाम करने की मांग की और ऐसा न करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी, जिसके बाद वे वहां से चले गए।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब उसने अपने भाई को धमकी के बारे में बताया, तो मामले को हल्के में लिया गया, और इसके चलते परिवार ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 26 दिसंबर को उसके जान-पहचान वाले एक व्यक्ति भूरा टुट्टल ने उसे बताया कि अनीस सकलानी की पत्नी यास्मीन जहां, अपने बेटे अदनान और दूसरे साथियों के साथ अनीस सकलानी, फैजुल नबी और मोइन से मिलने जेल गई थी, जो हिंसा के मामलों में आरोपी हैं। उसने दावा किया कि जब दूसरे लोग बाहर इंतज़ार कर रहे थे, तो यास्मीन जहां अकेले उनसे मिलने जेल के अंदर गई।

शिकायतकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि जेल के अंदर अनीस सकलानी और दो अन्य आरोपियों ने IMC के सीनियर नेताओं के समर्थन से साजिश रची और यास्मीन जहां को फिरदौस को मारने का निर्देश दिया। यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने यास्मीन से कहा कि जो भी रास्ते में आए, उसके साथ भी वैसा ही सलूक किया जाए, ताकि कोई भी उनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत न करे।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि साजिश रचने के बाद आरोपियों ने फिरदौस को 5 लाख रुपये में मारने के लिए पीलीभीत जिले के फरकान नाम के एक आदमी से सौदा किया। उसके अनुसार रकम का कुछ हिस्सा एडवांस के तौर पर पहले ही दिया जा चुका था और कॉन्ट्रैक्ट किलर को उसके घर के पास घूमते देखा गया था। फिरदौस खान की FIR के आधार पर इस मामले में यासीन और उनके बेटे अदनान समेत 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

बरेली में कब हुई थी हिंसा?

पिछले साल 26 सितंबर को बरेली में उस समय हिंसा भड़क गई थी, जब पुलिस ने शुक्रवार की नमाज़ के बाद ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे पोस्टर लिए लोगों के एक ग्रुप को इकट्ठा होने से रोक दिया था। जब कुछ लोगों ने विरोध किया, तो कथित तौर पर पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए बल का इस्तेमाल किया, जिससे अराजकता फैल गई। रिपोर्ट्स के अनुसार भीड़ ने पत्थर फेंके, नारे लगाए और पुलिस पर गोलियां भी चलाईं। यह विरोध तब हुआ जब कानपुर में पुलिस ने अगस्त में पैगंबर के जन्मदिन के मौके पर बारावफात जुलूस के लिए लगाए गए ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर और एक लाइटबोर्ड को लेकर 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा खान इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में से हैं और फिलहाल जेल में हैं। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।