पंद्रहवीं वित्तायोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक सुधार महज केंद्र सरकार नहीं ला सकती है, इसके लिए राज्यों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक सुधार में राज्य की अहम भूमिका हो सकती है। एन.के. सिंह यहां इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (आईएसपीपी) के शुभारंभ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “भारत में संरचनात्मक सुधार की जरूरत है। आमूल आर्थिक सुधार लाना अकेले केंद्र सरकार के बस की बात नहीं है, क्योंकि रोजगार, खाद्य सुरक्षा भूमि सुधार, शिक्षा आदि कई क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें सुधार लाने में राज्यों की अहम भूमिका हो सकती है। सिंह ने कहा कि आईएसपीपी का शुभारंभ ऐसे दौर में हो रहा है, जब अनेक बुनियादी समस्याओं का बेहतर समाधान तलाशने की जरूरत है।

इससे पहले बुद्धिजीवी व प्रख्यात लेखक गुरुचरण दास ने अपने संबोधन में चार प्रमुख सुधारों की आश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “देश में प्रशासिनक सुधार, न्यायिक सुधार, पुलिस सुधार और चुनाव सुधार की जरूरत है। दास ने चुनावी व्यवस्था पर सवाल किया और कहा कि देश में हमेशा चुनावी मूड क्यों बना रहता है। लिहाजा चुनाव सुधार जरूरी है।
सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट डॉ. पार्थ शाह ने कहा कि आईएसपीपी का मकसद नीति निर्माण व सुझावों के लिए ऐसे पेशेवरों को तैयार करना है, जो देश की चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम हों।

हालांकि हमारा देश तरक्की कर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था में भी काफी सुधार हो रहा है। मंगलवार को ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का समर्थन किया है। आईएमएप ने इस साल और अगले साल भारत को सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के तौर पर अनुमान जताया। आईएमएफ ने साल 2018 के लिए भारत की विकास दर के 7.3 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है। यदि आईएमएफ का यह अनुमान सही साबित होता है तो साल भारत 2018 में चीन को 0.7 फीसदी और 2019 में 1.2 फीसदी के अतंर से पछाड़कर विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

आईएमएफ की बाली में सालाना बैठक से पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) में कहा गया, “भारत में हाल के वर्षो में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं, जिसमें जीएसी, महंगाई लक्षित ढांचा और दिवालियापन कानून है। इसके साथ ही भारत में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाने के भी उपाय किए हैं। रिपोर्ट में बाहरी कारकों का हवाला देकर कहा गया, “तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और वैश्विक वित्तीय स्थितियों को कड़ा करने से भारत की विकास दर अगले साल 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है, जो विश्व में सर्वाधिक होगी। आईएमएफ का यह भी कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापर युद्ध की वजह से चीन की विकास दर प्रभावित हो सकती है।