बिहार में अब शिक्षण से जुड़े एक घोटाले की खबर सामने आई है। विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को राज्य में महादलित वर्ग को अंग्रेजी सिखाने के मामले में हुए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए केस दर्ज किया है। बताया गया है कि राज्य में महादलित विकास मिशन को इस वर्ग के लोगों को कई कौशल योजनाओं में ट्रेनिंग देनी थी। साथ ही इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स भी कराना था। इसके लिए बकायदा ब्रिटिश लिंगुआ को जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि, जांच में सामने आया है कि ठेका देने में खासी गड़बड़ियां हुईं और पूरा कोर्स कागजों पर ही पूरा हो गया।

विजिलेंस की जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, मिशन का कहना है कि 14 हजार 826 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि जांच में खुलासा हुआ है कि एक प्रशिक्षणार्थी एक ही समय में दो अलग-अलग सत्र में मौजूद रहे। यानी एक ही नाम और पते का एक प्रशिक्षणार्थी एक साथ दो बैच में मौजूद रहा, जो कि असंभव है। खास बात यह है कि इसमें दो अलग-अलग लोगों के साइन भी पाए गए।

विजिलेंस ब्यूरो ने अब इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। इसमें कहा गया है कि महादलितों को अंग्रेजी सिखाने के नाम पर महादलित विकास मिशन के पदाधिकारियों और ब्रिटिश लिंगुआ के डायरेक्टर ने आपसी मेलजोल से भ्रष्टाचार किया। कहा गया है कि मिशन ने स्पोकन इंग्लिश कोर्स के लिए षड़यंत्र किया और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इस दौरान ब्रिटिश लिंगुआ को कोर्स के लिए 7 करोड़ 30 लाख रुपए का भुगतान भी हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में एक मौजूदा आईएएस अफसर एसएम राजू के अलावा तीन रिटायर्ड अफसरों को भी आरोपी बनाया गया है। इनके नाम हैं- राघवेंद्र झा, राज नारायण लाल और रामाशीष पासवान। इन सभी पर ब्रिटिश लिंगुआ को भुगतान करवाने का आरोप है। इसके अलावा तत्कालीन राज्य परियोजना पदाधिकारी श्रीमती देव जानी कर, ओएसडी अनिल कुमार सिन्हा, मिशन को-ऑर्डिनेटर शशि भूषण सिंह, ओएसडी हरेंद्र श्रीवास्तव, सहायक मिशन निदेशक वीरेंद्र चौधरी और ब्रिटिश लिंगुआ के निदेशक बीरबल झा पर भी भ्रष्टाचार और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।