दिल्ली कांग्रेस के मुखिया अजय माकन ने दावा किया है कि केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार बनने की सूरत में दस दिनों के भीतर दिल्ली में सीलिंग बंद करा दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की गलत नीतियों के कारण राजधानी में करीब 30 हजार कारखाने व दुकानें सील हुई हैं और लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। चांदनी चौक जिला कांग्रेस के बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए माकन ने कहा कि 1984 के दंगों को नरसंहार घोषित करने से पहले दिल्ली सरकार को गुजरात में 2002 में हुए दंगों को नरसंहार घोषित करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर पारित किए गए प्रस्ताव के पीछे भाजपा व आम आदमी पार्टी की मिलीभगत है।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 के दंगों को लेकर पहले ही खेद जता चुके हैं क्योंकि इस तरह के दंगे भारत की धर्म निरपेक्षता की सोच के खिलाफ हैं। उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर उस प्रस्ताव से राजीव गांधी का नाम निकालने की मांग की जिसमें उनसे भारत रत्न वापस लेने की मांग की गई थी। माकन ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में आती है तो ज्यादा से ज्यादा लाभ किसानों, मजदूरों, गरीबों व आम लोगों को होता है जबकि भाजपा के राज में अडाणी व अंबानी जैसे पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जाता है।

सीलिंग फीलिंग अभियान से सांसदों को घेरेगी ‘आप’
एक साल से सीलिंग रुकने का इंतजार कर रहे कारोबारियों को जोड़ने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) ने सीलिंग फीलिंग अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत पार्टी सीलिंग रुकवाने के लिए दिल्ली के सातों सांसदों पर संसद में कानून बनवाने का दवाब बनाएगी और उन्हें इस बाबत ज्ञापन सौंपेगी। इसकी शुरुआत रविवार को नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी को ज्ञापन सौंपकर की गई। इस मुहिम से आम आदमी पार्टी कानून बनवाने के लिए सांसदों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। नई दिल्ली लोकसभा सीट के प्रभारी व ट्रेड विंग के संयोजक बृजेश गोयल ने बताया कि इस पहल से आम आदमी पार्टी यह समझाना चाहती है कि जब रोजी-रोटी पर ताला लग जाता है तो कारोबारी को कैसा महसूस होता है। दिल्ली में 22 दिसंबर को सीलिंग का एक साल पूरा हो गया है। इस वजह से हजारों लोग अपने रोजगार से हाथ धो बैठे हैं। उनमें न केवल कारोबारी शामिल हैं, बल्कि उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं।