बवाना थाना क्षेत्र में एक शिक्षिका की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के समय शिक्षिका स्कूटी से स्कूल जा रही थीं, तभी अज्ञात हमलवारों ने उन पर गोलियां चलार्इं, जिसमें से तीन गोलियां शिक्षिका को लगीं। वारदात के बाद वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने शिक्षिका को सड़क पर पड़ा देखा तो उसने उन्हें पास के महर्षि वाल्मिीकि अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने शिक्षिका को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को वारदात की सूचना सोमवार सुबह करीब 8:05 बजे दी थी। सूचना मिलने पर पुलिस की एक टीम घटनास्थल पर पहुंची, जबकि दूसरी टीम अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया है।

रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त रजनीश गुप्ता ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के जरिए लोगों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। उपायुक्त के मुताबिक, 38 साल की सुनीता अपने पति मंजीत के साथ बवाना गांव में रहती थीं। उनके पति का प्रॉपर्टी का काम हैं। दंपति के 16 साल की बेटी और आठ साल का बेटा है। सुनीता मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत की थीं। तीन साल पहले उन्होंने ही बवाना में एक प्लॉट खरीदकर मकान बनवाया था और वहीं रह रहीं थीं। रोज की तरह वह स्कूटी से हरियाणा के एक स्कूल जा रही थीं, तभी दिल्ली-हरियाणा के औचंदी बॉर्डर पर अज्ञात हमलावारों ने उन पर गोलियां बरसार्इं। एक गोली उनके पेट में, जबकि दो गोलियां छाती पर लगीं।

हरियाणा सरकार के सक्षम अभियान के तहत मिलना था सम्मान

सुनीता का फाइल फोटो

निर्भय कुमार पांडेय

सुनीता होशियार और मेहनती थीं, इस बात का पता इसी से चलता है कि कई साल तक निजी स्कूल में पढ़ाने के दौरान वह सरकारी स्कूल में नौकरी के लिए कोशिश करती रहीं और सफलता पाई। आठ साल पहले उनकी हरियाणा के सरकारी परिषदीय विद्यालय में नौकरी लगी थी। अपने काम के प्रति निष्ठा की वजह से उनको हरियाणा स्तर पर चल रहे सक्षम लक्ष्य अभियान में सम्मानित किया जाना था। लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई। प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष व सुनीता के सहकर्मी विनोद ने बताया कि सक्षम लक्ष्य अभियान में हरियाणा स्तर पर खरखौंदा ब्लॉक के प्रथम आने पर सोमवार सुनीता को सम्मानित किया जाना था। वह पांचवीं कक्षा को पढ़ाती थीं। स्कूल के अन्य सहकर्मियों का कहना है कि सुनीता बहुत ही मेहनती और मिलनसार थीं। इस घटना के बाद परिवार और स्कूल में मातम का फैला हुआ है। विद्यार्थी भी अपनी शिक्षक को खोने से दुखी हैं। सुनीता के परिजनों ने बताया कि शुरुआत से ही वह शिक्षिका बनाना चाहती थीं। यही कारण है कि जब उनकी सरकारी नौकरी नहीं लगी थी, तब से वह पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी स्कूल में पढ़ाती थीं। कई बार विफल होने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और परीक्षाएं देती रही।

आठ साल पहले हरियाणा सरकार के प्राथमिक विद्यालय में उनकी नियुक्ति हुई थी। मंजीत के भाई संजीत ने बताया कि सुनीता की मेहनत की वजह से उनके परिवार ने उन्हें बीएड करवाया था। उन्होंने बताया कि बवाना में जहां सुनीता रहती थी। वहां से आठ किलोमीटर दूर उनका स्कूल है। स्कूल सोनीपत जिले में है। संयुक्त रूप से रहने के लिए बवाना में बनवाया था घर सुनीता के पति मंजीत अपनी मां के साथ रहते थे, जबकि बड़े भाई के साथ पिता रहते थे। मंजीत के बड़े भाई दिल्ली के कंझावला में अपने परिवार के साथ रहने लगे थे। लेकिन बाद में पूरा परिवार तीन साल पहले बवाना में बनाए गए नए मकान में रहने लगा था। मंजीत के भाई संजीत ने बताया कि माता-पिता साथ रहे इसलिए परिवार ने बवाना में घर बनवाया था।

पुलिस को मिली है डायरी
पुलिस उपायुक्त का कहना है कि जांच के दौरान एक डायरी भी मिली है, जिसे कभी-कभी लिखा गया है। पुलिस हर कोण से मामले की पड़ताल कर रही है। वहीं, सुनीता के भाई अनिल मलिक का कहना है कि इस वारदात के पीछे किसी जानकार का हाथ भी हो सकता है। उनके परिवार को किसी से कोई पुरानी या फिर आपसी रंजिश नहीं है।