बलिया की एक अदालत ने महिलाओं को अपमानित करने एवं उनके साथ मारपीट करने की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य राज्य मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल के विरुद्ध परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने रानी देवी की शिकायत का संज्ञान लेते हुए गत 22 जुलाई को परिवाद दर्ज करने आदेश दिया। रानी देवी के अधिवक्ता मनोज राय हंस ने सोमवार को बताया कि अदालत का आदेश आज जारी किया गया। हंस ने बताया कि रानी देवी ने शिकायत की है कि वह एवं जिले के अन्य गांव के लोग एवं महिलाएं गत पांच अप्रैल 2021 को संसदीय कार्य राज्य मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल से उनके निवास पर निः शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा कानून 2009 के तहत विद्यालयों द्वारा पाठ्य पुस्तक व अन्य सहायता उपलब्ध कराने की मांग करने गये थे तो मंत्री भड़क गए।
रानी देवी ने आरोप लगाया कि राज्य मंत्री के भड़कने पर उनके समर्थकों द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट एवं अभद्रता की गई, जिसमें महिलाएं अर्धनिर्वस्त्र हो गईं। रानी देवी ने शिकायत में संसदीय कार्य राज्य मंत्री शुक्ल, उनके भाई आद्या शुक्ल, बलिया शहर कोतवाली के प्रभारी बाल मुकुंद मिश्र, राज्य मंत्री के 25 समर्थकों एवं 25 पुलिस कर्मियों को आरोपी बनाया है।
हंस ने बताया कि अदालत ने इस शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। महिला के वकील मनोज राय हंस ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोमवार को यह आदेश एक रानी देवी द्वारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत दायर आवेदन पर पारित किया।
बता दें कि 5 अप्रैल को पुलिस ने मंत्री के कैंप कार्यालय में कथित तौर पर हंगामा करने और उनके साथ ‘दुर्व्यवहार’ करने के आरोप में चार महिलाओं और एक पुरुष को हिरासत में लिया था।
शुक्ला ने दावा किया था कि यह घटना “प्रायोजित” थी और महिलाओं के आक्रोश को एक “साजिश” का हिस्सा बताया था। हालांकि, महिलाओं ने आरोप लगाया था कि शुक्ला ने “एक महिला के सिर पर जूते से वार किया” और अपने समर्थकों की मदद से उन्हें परिसर से बाहर निकाल दिया।
