राबड़ी देवी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव के घर के अंदर का दृश्य और दंपति की गोद में बैठे तेजस्वी और तेजप्रताप। भारतीय राजनीति में 1990 की यह फोटो खास थी क्योंकि एक सूबे के मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ सर्वेंट क्वार्टर में रह रहे थे। यह सामाजिक बदलाव की तस्वीर थी। पत्नी के साथ रसोईघर में रामविलास पासवान तो कुदरती नजारों के बीच बैठे चंद्रशेखर। राखियों से भरे दोनों हाथ में मुसकुराते हुए राजीव गांधी। अटल बिहारी वाजपेयी से गले मिलते अटल बिहारी वाजपेयी तो लालकृष्ण आडवाणी को कुर्सी की तरफ एक साथ इशारा करते नरेंद्र मोदी और अमित शाह।
फोटो पत्रकार प्रवीण जैन की खींची तस्वीरों का कोलाज भारत के साढ़े तीन दशक से ज्यादा समय का राजनीतिक इतिहास बता रहा है। एआइएफएसीएस की कला दीर्घा में शुक्रवार को शुरू हुई फोटो प्रदर्शनी ‘200 एंड वन’ किसी घटना का महज दस्तावेजीकरण भर नहीं है। यह भारतीय सत्ता के बदले चरित्र की सचित्र गाथा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने किया। प्रदर्शनी आठ नवंबर तक चलेगी।
पत्रकारिता को इतिहास का दस्तावेज माना जाता है तो फोटो पत्रकारिता इस ऐतिहासिक दस्तावेज को बेहतर और विश्वसनीय बनाती है। यह संयोग है कि इस प्रदर्शनी की शुरुआत उस समय हुई जब 1987 के हाशिमपुरा जनसंहार पर दोषियों के खिलाफ फैसला आ चुका है। इस केस में प्रवीण जैन की तस्वीरों ने अहम भूमिका निभाई थी। यह प्रदर्शनी बताती है कि जब तोप मुकाबिल हो तो कैमरा और कलम की कदमताल ही मुकम्मल अखबार बना सकती है। इंडियन एक्सप्रेस के एसोसिएट एडिटर (फोटो) प्रवीण जैन ने 1981 में अपना करियर शुरू किया और फोटो पत्रकारिता को एक मुकाम पर ले गए। दस प्रधानमंत्री, आठ राष्टÑपति और कई मुख्यमंत्रियों की गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद करने वाले जैन की तस्वीरें अपनी अलग छाप छोड़ती हैं। खासकर आज के नेताओं के ‘डिजायनर’ जीवनशैली के विपरीत लालू यादव, चंद्रशेखर और पासवान जैसे नेताओं का सहज और घरेलू चित्रण। अपनी तस्वीरों के संदर्भ में प्रवीण जैन ने कहा कि अस्सी के दशक और आज के समय के बीच बहुत कुछ बदल गया है। फोटो पत्रकारिता पहले भी बहुत आसान नहीं थी लेकिन आज कई तरह की पाबंदियों के कारण और भी मुश्किल हो गई है। एक फोटो पत्रकार के लिए मौका और समय से चूकना बहुत खतरनाक होता है। आपके हाथ में कुछ नहीं होता और आप एक अनिश्चित के साथ एक निश्चित की खोज में निकलते हैं।

