Dussehra 2019: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में दशहरे के मौके पर राजा की मौजूदगी में रावण दहन की 200 से अधिक वर्षों की परम्परा इस बार टूट गई। बता दें कि जौनपुर राज के राजा अवनींद्र दत्त दुबे की तबीयत खराब होने के कारण राजा का दरबार हवेली की बजाय उनके आवास में लगा। इस तरह यहां पर शस्त्र पूजन हुआ और उसके बाद दरबारियों ने राजा को लगान देने की परम्परा निभाई। मामले में जौनपुर राज के सूत्रों ने बताया कि इस राजवंश की स्थापना 1797 में हुई थी। बता दें कि स्थापनाकाल से ही राजा हवेली में दशहरा के पावन पर्व पर शस्त्र पूजन करते थे और उसके बाद ‘दरबारियों’ द्वारा उन्हें लगान दिया जाता था।
हवेली के पुरोहित ने की औपचारिकताः रावण दहन के मामले में जौनपुर राजा के सूत्रों ने बताया कि पूर्व में शाही सवारी हवेली से निकल कर राजा साहब के पोखरे पर जाती थी। जहां राजा की मौजूदगी में रावण दहन किया जाता था और मंगलवार (08 सितंबर) को यह सवारी नहीं निकली। वहीं उनकी तबियत को देखते हुए हवेली के पुरोहित जनार्दन मिश्र ने जाकर रावण दहन की औपचारिकता को पूरा किया।
परंपरा के टूटने से सभी हैरानः बता दें कि लोकतंत्र की स्थापना के बाद राज व्यवस्था समाप्त हो गई थी, लेकिन सांकेतिक रूप से यह पुरानी परम्परा कायम थी। प्राचीन रवायत टूटने से नगर वासियों में मायूसी दिखी है। इस बीच पोखरे पर लगे मेले में आज पहुंचे सैकड़ों नागरिक भी इस परंपरा को टूटने से हैरान थे।
1797 से चली आ रही थी रावण दहनः गौरतलब है कि जौनपुर रियासत की स्थापना तीन नवम्बर 1797 में हुई थी और इसके पहले राजा शिवलाल दत्त थे। बताया जाता है कि दशहरा पर इस परम्परा की नींव भी तभी पड़ी थी। उस समय से लेकर आजतक हर साल राजा की मौजूदगी में रावण दहन किया जाता रहा है।
