गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के मोदी सरकार के फैसले को अब झारखंड ने भी लागू कर दिया है। मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसकी घोषणा कर दी है। घोषणा के मुताबिक राज्य में 15 जनवरी के बाद से होने वाली सरकारी नौकरियों और स्कूल-कॉलेजों में होने वाले एडमिशन में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुजरात में गरीब सवर्णों को आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

नई व्यवस्था के बाद ही प्रवेश-नियुक्तिः राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी अन्य विभागों को आदेश जारी कर दिया है। इसके मुताबिक अधिसूचना जारी होने से पहले नियुक्ति के लिए कोई अधियाचना भेजने पर रोक लगा दी है। यानी अब किसी भी तरह की सरकारी नियुक्ति की प्रक्रिया नई व्यवस्था लागू होने के बाद ही शुरू हो सकेगी। ऐसा ही शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश को लेकर भी होगा। नियुक्ति विज्ञापन या एडमिशन फॉर्म यदि पहले ही जारी हो चुके हैं तो उनमें पुरानी व्यवस्था का ही पालन किया जाएगा। उसमें सरकार पुराने विज्ञापन को रद्द कर नया विज्ञापन जारी कर सकती है।

ऐसी होगी आगे की प्रक्रियाः संविधान में आरक्षण के लिए 50 फीसदी की अधिकतम सीमा तय है। अनुच्छेद 16 (4) के मुताबिक अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी, अनुसूचित जाति के लिए 15 फीसदी और 27 फीसदी कोटा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए तय है। वहीं सीधी भर्तियों में यह कोटा क्रमशः 7.5 फीसदी, 16.66 फीसदी, 25.84 फीसदी है। ऐसे में सवर्णों को आरक्षण देने के लिए इसमें सीमा विस्तार करना होगा जिसके लिए विधानसभा से बिल पास कराना जरूरी होगा।