भाजपा के बाद अब दीदी के निशाने पर कांग्रेस भी आ ही गई। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के मुद्दे पर मचे घमासान और अदालती दांव-पेच के बाद ममता ने तेवर दिखा दिए। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर दीदी ने कांग्रेस की खिंचाई कर दी। साथ ही पंचायत चुनाव पर कुप्रचार के जरिए विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी जड़ दिया। एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में ममता ने खुलासा भी कर दिया कि सोनिया और राहुल से उन्होंने ऐसा प्रस्ताव नहीं लाने को कहा था। लेकिन उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया। कांग्रेस के कदम को सियासी चूक भी कह डाला। लगे हाथ वजह भी बता दी कि उन्होंने क्यों नहीं किया था प्रस्ताव का समर्थन।
ममता ने दो टूक कहा कि उनकी पार्टी न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप की हिमायती नहीं। कांग्रेस को ताना मारने से भी नहीं चूकी। तोहमत लगा दी कि संसद के भीतर तो कांग्रेस चाहती है कि तृणमूल कांग्रेस उसका साथ दे पर बंगाल में वही कांग्रेस उनकी पार्टी के खिलाफ कुप्रचार में जुटी है। जिसे कोई सही नहीं ठहरा सकता।
पंचायत चुनाव के चक्कर में हो रही हिंसा के मुद्दे को भी भूली नहीं। सफाई दी कि आम धारणा चाहे जो हो पर हकीकत यही है कि इस हिंसा के शिकार तृणमूल कांग्रेस के लोग ही हो रहे हैं। भले विपक्ष लाख रोना रोए कि उसके उम्मीदवार परचे दाखिल नहीं कर पाए। अगर उनकी शिकायत में सच्चाई होती तो फिर उनके 50 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने कैसे कर दिए अपने परचे दाखिल। मीडिया के एक वर्ग को भी हालात का दोषी ठहरा दिया। फरमाया कि विपक्ष के साथ मिलकर यही वर्ग उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश में है। ममता की मानें तो पंचायत चुनाव में विपक्ष की जीत संभव है ही नहीं, यह बात विपक्ष बखूबी जानता है। इसीलिए कानूनी दांव पेंच के जरिए चुनाव प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने के हथकंडे अपना रहा है।

