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‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ ये नारा सुनते ही हर हिंदुस्तानी के रगों में जोश भर जाता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ये नारा दिया था। नेताजी का जीवन देश के प्रति निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है। (Photo Source: Indian Express)
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आज सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन कई रहस्यों से भरा रहा। वो कभी पंजाबी बन जाते तो कभी मौलवी बन अंग्रेजों को चमका देकर उनकी नाक के नीचे से निकल जाते थे। (Photo Source: Indian Express)
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नजरबंद का किस्सा
नेताजी परिस्थिति के अनुसार अपना नाम बदल लेते थे। साल 1941 का एक किस्सा है जब अंग्रेजों ने उन्हें कोलकाता में उनके घर में ही नजरबंद कर दिया था। उनके घर के आसपास अंग्रेजी हुकूमत के सिपाहियों को कड़ा पहरा था। उनसे कौन मिलने आ रहा है, किससे बात कर रहे हैं क्या खा रहे हैं यहां तक कि उनके लिए जो चिट्ठी आती थी उसे पहले ही पोस्ट ऑफिस में पढ़ लिया जाता था। (Photo Source: Indian Express) -
मोहम्मद जियाउद्दीन की कहानी
इसके बाद उन्होंने अपना पूरा हुलिया बदल लिया और नाम बदल मौलवी मोहम्मद जियाउद्दीन रख लिया। देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वह सुभाष चंद्र बोस हैं। पुलिस से लेकर खुफिया जासूसों के नाक के नीचे से सुभाष चंद्र बोस निकल गए और कानों कान किसी को खबर नहीं हुआ। (Photo Source: Indian Express) -
चेहरे पर लंबी दाढ़ी, बदन पर पठानी कुर्ता और सिर पर टोपी पहने सुभाष चंद्र बोस पुरी तरह से मौलवी मोहम्मद जियाउद्दीन हन चुके थे। जब वह घर से निकले तो हर कदम पर जासूस और पुलिस का खतरा था। घर से जब वह निकले तो कभी उर्दू में बात करते तो कभी बिना जवाब दिए निकल जाते। (Photo Source: Indian Express)
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पुलिस और जासूसों के नाक के नीचे से कोलकाता से पहुंचे पेशावर
कोलकाता से निकलकर नेताजी को पेशावर पहुंचना था। जियाउद्दीन बन वह कालका मेल से दिल्ली पहुंचे। इसके बाद फ्रंटियर मेल से पेशावर पहुंचे। उस दौरान द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और दिल्ली राजधानी होने के कारण खुफिया जासूसों से भरा पड़ा था। लेकिन नेताजी ने अपनी हुलिया ऐसी बनाई थी वो पूरी तरह से मौलवी लग रहे थे। (Photo Source: Indian Express) -
दोस्त ने कैसे पहचाना
जब वह पेशावर छावनी रेलवे स्टेशन पर उतरे तो वहां राजनीतिक दल ‘फॉरवर्ल्ड ब्लॉक के फ्रंटियर’ के नात अकबर शाह उनके पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, नेताजी को अकबर पहचान गए। क्योंकि, नेताजी यानी जियाउद्दीन ने जो पठानी सवाल पहना था उसे अकबर शाह ने ही कलकत्ता से खरीदा था। (Photo Source: Indian Express) -
बहरा पठान बन पहुंचे अफगानिस्तान
मिया अकबर शाह अपने किताब नेता जी इस ग्रेट एस्केप में बताया है कि पेशावर से निकलने वक्त सुभाष चंद्र बोस ने जियाउद्दीन का वेश त्याग करते हुए एक बहरे पठान का वेश धारण कर लिया। ये वेश उन्होंने इसलिए धारण किया था क्योंकि, उन्हें पश्तो बोलनी नहीं आती थी। भारत की सीमा पार करते हुए वह अफगानिस्तान के काबुल पहुंचे। इसके बाद लाहौरी गेट के पास एक सराय में ठहरें। (Photo Source: Indian Express) -
काबुल से निकलने का षड्यंत्र
पहले वह सोवियत जाना चाहते थे लेकिन जब बात नहीं बनी तो वह जर्मनी दूतावास गए। जहां बात बन गई। कुछ दिनों बाद उनके पास एक संदेश आया कि अफगानिस्तान से अगर वो निकलना चाहते है तो काबुल में इटली के राजदूत पाइत्रो क्वारोनी से मिलना होगा। (Photo Source: Indian Express) -
फिर बदलनी पड़ी हुलिया
फिर उन्होंने 22 फरवरी 1941 की रात को इटली के राजदूत से नेताजी की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के करीब 16 दिन बाद इटैलियन राजदूती की रूसी पत्नी सुभाष चंद्र बोस के लिए एक संदेश लेकर आईं कि वह दूसरों कपड़ों में अपनी फोटो खिचंवाएं ताकि वह इटैलियन लगें। (Photo Source: Indian Express) -
बहरा पठान से ओरलेंडो मेजेरेटा
उनकी तस्वीर को एक इटैलियन राजनयिक आरलोंडा मजोटा के पासपोर्ट पर लगा दिया गया और वह अब बन गए ओरलेंडो मेजेरेटा। इसके बाद उन्हें एक इटैलियन राजनयिक के घर पर शिफ्ट कर दिया। इसके बाद अफगानिस्तान के बॉर्डर को पार करते हुए वह पहले समरकंद पहुंचे फिर ट्रेन से मास्को के लिए रवाना हो गए। इसके बाद वहां से वह जर्मनी की राजधानी बर्लिन के लिए निकल पड़े। (Photo Source: Indian Express) -
जर्मनी में कोई न पहचान सका
सुभाष चंद्र बोस जब जर्मनी गए उस दौरान उनका नाम ओरलेंडो मेजेरेटा ही था। उस दौरान अंग्रेजी हुकूमत के जासूस न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में भी मौजूद थे खासकर जर्मनी और जापान जैसे देशों काफी ज्यादा ब्रिटिश जासूस थे। (Photo Source: Indian Express) -
कमांडर मक्सूद बन जापान जब पहुंचे
एक बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान सबमरीन में बैठकर पहुंचे थे। उस दौरान युद्ध के हालात थे ऐसे में पानी के अंदर भी जंग जारी थी। लेकिन नेताजी सुरक्षित जापान पहुंचे। जब वह पनडुब्बी में गए तो वहां उन्होंने अपना नाम कमांडर मक्सूद रख लिया था। (Photo Source: Indian Express) नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अनूठी लव स्टोरी, जानिए कैसा था दोस्ती-प्यार और गुपचुप शादी का उनका अनोखा सफर