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माघ मेला 2026 की शुरुआत के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में एक बार फिर से आस्था का बड़ा केंद्र बना दिया है। कड़ाके ठंड में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु स्नान के लिए संगम नगरी पहुंच रहे हैं। माघ मेला 15 फरवरी, 2026 तक चलेगा। इस दौरान हर दिन लाखों लोग यहां आते हैं। (Photo: PTI)
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माघ मेला में आए श्रद्धालु स्नान करते हैं तो कई दान देता है, कोई पूजा-पाठ करता है तो चुपचाप बैठकर खुद को खुद में तलाशता है। यहां एक अलग ही अनुभूती होती है। माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान के साथ ही दान-पुण्य, पूजा-पाठ से लेकर कल्पवास करने जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार इन सभी पुण्य कार्यों का फल साधक को मिलता है और उसके पापों का नाश होता है। (Photo: PTI)
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मेले के दौरान संगम में डुबकी लगाने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शुद्धि होती है और नकारात्मकता का अंत होता है। माघ मेला हर साल आयोजित किया जाता है। इसमें आध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। (Photo: ANI)
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हवन और यज्ञ
माघ मेले में त्रिवेणी घाट पर स्नान के बाद पूजा-पाठ में हिस्सा लिया जाता है। वहां पर लगे शिविरों में बड़े स्तर पर हवन और यज्ञ का आयोजन किया जाता है। साधु-संत कथाएं और हवन करते हैं। (Photo: PTI) प्रयागराज के 8 स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड्स, Magh Mela के लिए जा रहे हैं जरूर चखें स्वाद -
पितृ तर्पण और श्राद्ध
माघ मेले में लोग अपने पितरों की शांति के लिए संगम पर पिंडदान और तर्पण भी करते हैं। माघ मास में काले तिल से पितरों का तर्पण करना विशेष फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि त्रिवेणी घाट पर ये क्रिया करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। (Photo: PTI) -
दान
माघ मेले में दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ करवाने के बाद गौ दान और दीपदान से जीवन की तमाम परेशानियों के बंधन से मुक्ति मिल सकती है। (Photo: PTI) -
तिल का दान
माघ मेले के दौरान तिल का दान करना फलदायी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार तिल का दान करने से सूर्यदेव का आशीर्वाद मिलता है। जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में हैं उन्हें तिल का दान जरूर करना चाहिए। (Photo: PTI) -
महत्व
महाकुंभ और माघ मेला लगने की सबसे बड़ी वजह अमृत की बूंदें मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर जब देवताओं और असुरों में छीना-झपटी हुई तो अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी थी जिसमें प्रयागराज भी शामिल था। बाकी तीन जगह हरिद्वार, नासिक और उज्जैन हैं। मान्यता है कि माघ के दौरान संगम का जल अमृत के समान हो जाता है। (Photo: ANI) मनुष्य 9 महीने बाद ही क्यों जन्म लेता है? क्या गर्भ में आत्मा को पूर्व जन्म का बातें याद रहती हैं