
भारत की इन 9 कारोबारी हस्तियों का जीवन संघर्ष, कामयाबी की कहानी की कई जबरदस्त मिसाल पेश करते हैं। जानिए भारत के इन नवरत्न के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें। -
धीरूभाई अंबानी-रिलायंस ग्रुप के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का जन्म गुजरात के चोरवाड़ नाम के एक गांव में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल के टीचर थे। धीरूभाई अंबानी ने यमन में बतौर एक गैस स्टेशन अटेंडेंट काम किया। इसके बाद उन्होंने मुंबई में मसालों और धागे का कारोबार भी किया और 1966 में अहमदाबाद में पहली कपड़े की फैक्ट्री लगाई। 2002 में जब उनकी स्ट्रोक के कारण मृत्यु हो गई तो उन्हें दुनिया का 138वां सबसे अमीर आदमी की रैंक दी गई। (Source: Express Archive)
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नारायण मूर्ति-अपनी पत्नी से महज 10 हजार रुपये उधार लेकर नारायण मूर्ति ने 1981 में अपने 6 साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की। आईआईटी कानपुर से मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पुणे और पैरिस में भी काम किया। इन्फोसिस का नाम आज दुनियाभर में मशहूर है। (Source: Express Archive)
देवी प्रसाद शेट्टी- कर्नाटक के एक छोटे से शहर में देवी प्रसाद शेट्टी का जन्म हुआ था। शेट्टी को 9 दिन के नवजात की कार्डियक सर्जरी और ओपन हार्ट सर्जरी के पहले वीडियो-हेल्पर होने की वजह से भारत में खासा जाना जाता है। 2001 में नारायण हरदयालय अस्पताल की चेन के स्थापना की। शेट्टी ही वह शख्स हैं जिन्होंने लाखों भारतीयों के लिए सस्ती कार्डियक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई। (Source: Express Archive) -
सीपी कृष्णन नायर- लग्जरी होटल चेन लीला पैलेस, होटल एंड रिसोर्ट के मालिक सीपी कृष्णन नायर का जन्म केरल के एक गरीब परिवार में हुआ था। स्कॉलरशिप पर पढ़ाई करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की और कप्तान पर हासिल किया। 1951 में उन्होंने ऑल इंडिया हेंडलूम बोर्ड की स्थापना की ताकि भारतीय कपड़े को विदेश में प्रोमोट किया जा सके। वहीं पहले लीला होटल की स्थापना उन्होंने 1987 में मुंबई में की थी। (Extreme left CP Krishnan Nair, Source: Express Archive)
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रोकेश झुनझुनवाला- रोकेश झुनझुनवाला को भारत का वारेन बफे भी कहा जाता है। असेट मैनेजमेंट कंपनी रेयर इंटरप्राइस के मालिक रोकेश झुनझुनवाला एक एस इंवेस्टर हैं। झुनझुनवाला ने अपने कॉलेज के दिनों में ही स्टॉक मार्केट में इंवेस्ट करना शूरू कर दिया था। वहीं 2016 में जब उनके परिवार का नेट वर्थ 10,000 करोड़ रुपये हुआ तो उन्होंने अपनी आमदनी का 25% दान करने की घोषणा की थी। (Source: Express Archive)
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कल्पना सरोज-मेटल ट्यूबिंग कंपनी कमानीट्यूब्स की हेड कल्पना सरोज एक दलित इंटरप्रेन्योर हैं जो कामयाबी की एक अलग ही मिसाल पेश करती हैं। 12 साल की उम्र में कल्पना की जबरन शादी करवा दी गई थी और 14 साल की उम्र में उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। 2006 में उन्होंने सरकार से लोन लेकर कर्ज में डूबी कमानी ट्यूब्स को खरीदा कंपनी को नई बुलंदियों तक पहुंचा दिया। कंपनी नेट वर्थ $100 डॉलर है। (Source: twitter)
कार्सन भाई पटेल- डिटरजंट पाउडर कंपनी निरमा के संस्थापक कार्सन भाई पटेल ने अपने घर के बैकयार्ड में ही डिटरजंट पाउडर बनाया था और उसे घर-घर जाकर बेचना शुरू किया था। इसके बाद 1969 में उन्होंने निरमा कंपनी की स्थापना की। उन्होंने कंपनी का नाम अपनी स्वर्गवासीय बेटी निरुपमा के नाम पर रखा था निरमा रखा था। (Source: File Photo) -
प्रताप सी रेड्डी-1979 में पहला अपोलो अस्पताल शुरू करने वाले प्रताप रेड्डी का जन्म पूर्व मद्रास प्रेसीडेंसी के एक छोटे से गांव में हुआ था। प्रशिक्षण से कार्डियोलॉजिस्ट रेड्डी सुविधाओं के अभाव के कारण एक युवा रोगी की मौत के बाद काफी आहत हुए जिसके बाद उन्होंने चेन्नई में 150 बिस्तर का पहले अपोलो अस्पताल की स्थापना की। अपोलो अस्पताल आज भारत की सबसे बड़ी अस्पताल श्रृंखलाओं में से एक है। अनुमान लगाया गया कि उनका नेट वर्थ करीब $ 690 मिलियन है। (Source: File Photo)
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राधाकृष्णन दमनी-एक कामयाब स्टॉकमार्केट ब्रोकर बनने के बाद राधाकृष्णन दमनी ने 2002 में रिटेल सेक्टर में कदम रखा और आज वह सुपरमार्केट चेन D-Mart के मालिक हैं। उन्होंने मुंबई में अपनी पहली D-Mart स्टोर खोलकर कारोबार की शुरुआत की। आज दमनी भारत के 15 सबसे अमीर लोगों की सूची में शुमार किए जाते हैं। (Source: File Photo)