
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रहे अनिल दवे का आज मध्यप्रदेश के बंद्राभन में नर्मदा नदी के किनारे पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। (PHOTO- PTI) 
दवे शुरुआत से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे और नर्मदा नदी बचाओ अभियान में काम कर रहे थे। पर्यावरण को बचाने के लिए उन्होंने कई किताबें भी लिखी थीं। पर्यावरण मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ था। (PHOTO- Twitter) 
मध्य प्रदेश के उज्जैन में जन्मे दवे 61 वर्ष के थे। वह एक कमर्शियल पायलट भी थे। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह की जीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके निधन पर मध्य प्रदेश में दो दिन का शोक घोषित किया गया है। इसके अलावा यूपी विधानसभा सत्र में भी निधन पर शोक व्यक्त किया गया। (PHOTO- Twitter) 
मौत से करीब पांच साल पहले 23 जुलाई, 2012 को अपनी वसीयत में दवे ने लिखा था कि उनके नाम पर कोई स्मारक न बनाया जाए, न ही उनके नाम पर कोई प्रतियोगिता, पुरस्कार या प्रतिमा इत्यादि विषय चलाए जाएं। उन्होंने लिखा है कि अगर कोई उन्हें याद करने के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, नदी संरक्षण, जलाशय संरक्षण करेगा तो उन्हें खुशी होगी। (PHOTO – PTI) 
अनिल माधव दवे का गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के एम्स में निधन हो गया था। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक जताया था। (PHOTO – PTI)