-
21 अक्टूबर, 1997 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बहुमत साबित करना था।साल 1996 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी और बसपा में छह-छह महीने के सीएम बनने का करार हुआ था। लेकिन जब दूसरी बार कल्याण सिंह के सीएम बनने की बारी आई तो मायावती ने अपना समर्थन वापस ले लिया। तब विधानमंडल में बहुमत साबित करने के दौरान पक्ष और विपक्ष भिड़ गया था। राजा भैया बीजेपी का समर्थन कर रहे थे और विधानमंडल में जो कुछ हुआ उसके बारे में हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया था।
-
राजा भैया ने द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में बताया था कि विधानमंडल में स्पीकर केशरीनाथ त्रिपाठी के निर्देशन में बहुमत की कार्यवाही चल रही थीं कि अचानक से एक चप्पल स्पीकर के पास फेंकी गई।
-
एक चप्पल के साथ शुरू हुई पक्ष-विपक्ष की लड़ाई माइक और शीशे के ग्लास तक पहुंच गई थी।
-
राजा भैया का कहना था कि पहले जूते चप्पल चले फिर माइक चले और उसके बाद विधायकों ने शीशे के ग्लास ही चला दिए थे।
-
शीशे के ग्लास चलने से बहुत से लोग चोटिल हुए थे और जूते चप्पल फेंक चुके विधायकों के पैरों में भी शीशे खूब गड़े थे।
-
राजा भैया ने बताया कि विधानमंडल में जो कुछ हुआ वह बहुत लोकतंत्र की बेहद शर्मनाक घटना थी लेकिन आत्मरक्षार्थ उन्होंने भी ग्लास और माइक फेंके थे।
-
हालांकि विधानमंडल में कल्याण सिंह ने बहुमत साबित कर दिया था। तब कल्याण को बीजेपी के समर्थक विधायकों की कुल संख्या से ज्यादा 46 और विधायकों का वोट प्राप्त हुआ था। कल्याण सिंह को 222 विधायकों का वोट मिला था।
-
बता दें कि, इस घटना के बाद से ही मायावती के लिए राजा भैया दुश्मन बन गए थे, क्योंकि उन्होंने बीजेपी का साथ दिया था। Photos: Social Media