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मायावती के शासन काल में राजा भैया को साल 2003 में जेल हुई थी। कई अपराध और मुकदमे के बीच राजा भैया के लिए दो आपराधिक कानून ज्यादा कष्टकारी थे। राजा भैया यूपी के एक नहीं, बल्कि कई जेलो में रहे थे, लेकिन उनके लिए सबसे ज्यादा कठिन समय कानपुर और बांदा जेल में रहा था। क्यों? चलिए जानें।
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राजा भैया ने बताया था कि कानपुर में करीब 11 महीने वह ऐसे बैरेक में थे, जिसमें किसी और अपराधी को नहीं रखा गया था। मानसिक रूप से तोड़ने के लिए उन्हें अलग बैरक में रखा गया था।
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उन्हें अपने बैरक से पूरे दिन में केवल दो घंटे के लिए ही निकाला जाता था और जब वह बाहर निकलते थे तो कैदियों के साथ वॉलीबॉल खेला करते थे।
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राजा भैया ने द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू जेल में रहने के दौरान के किस्से बताए थे। राजा भैया का कहना था कि जब वह बांदा जेल में थे उसके दो महीने बाद उन पर पोटा लगा दिया गया था।
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राजा भैया ने बताया था कि उसके बाद से ही पोटा राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया था। पोटा जैसे कानून के दुरुपयोग पर संसद में संवेद सदन बुलाया गया था। तब पूरे देश की राजनीति पोटा को लेकर दो धड़ों में बंट गई थी।
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राजा भैया का कहना था कि अंत में लंबी बहस के बाद पोटा को हटाया गया था और ये माना गया था कि इस कानून को बनाना एक भूल थी। उनका कहना था कि लेकिन वह ट्रायल के बाद ही बाहर इस मुकदमे से बरी हुए थे।
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उनके जेल से बाहर आने के बाद कोर्ट ने भी तन्हाई को लीगल नहीं माना और विधायक का कहना था कि कोर्ट किसी भी कैदी को अकेले बैरक में नहीं करने की बात कहती है।
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राजा भैया ने बताया की मई-जून के महीने में वह टीन की छत के नीचे थे और लूह और गर्मी से भी मुकाबला कर रहे थे। Photos: Social Media