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विश्व महिला दिवस पर चारों तरफ महिलाओं की देश व समाज में भूमिका को लेकर चर्चा की गई। बॉलीवुड में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने वाली इन महिलाओं के बारे में जानिये कुछ रोचक तथ्य-
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साल 2008 में शाहरुख खान के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली अनुष्का शर्मा एक सफल अभिनेत्री तो बनी ही, साथ ही साथ वो एक सफल फ़िल्म निर्माता भी बन गई हैं। अनुष्का कहती हैं कि सभी महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलना चाहिये, ये मौके उन्हें मजबूत बनायेंगे।
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कैमरे के दायरे से बाहर निकल कर अनविता दास ने गीतकार, स्क्रिप्ट राइटर, डायलॉग राइटर बनकर एक नई मिसाल पेश की है। अनविता कहती हैं कि हमें कोशिश करते रहना चाहिये और अगर आप वाकई अच्छी हैं तो फिर आपको कोई नहीं रोक सकता है।
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बॉलीवुड में एक प्रथा थी कि मेकअप आर्टिस्ट सिर्फ मर्द ही रहेंगे। लेकिन चारू ने इस भेदभाव के खिलाफ मुहिम चलाई और सुप्रीम कोर्ट ने महिला मेकअप आर्टिस्ट्स को भी मर्दों की तरह अधिकार देने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद बॉलीवुड में 50 साल में पहली बार महिला मेकअप आर्टिस्ट के लिए दरवाजे खुले।
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शाहरुख के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के 'ओम शांति ओम' की सफलता ने रातों रात उन्हें स्टार बना दिया। दीपिका के अचीवमेंट में हॉलीवुड की उनकी पहली फिल्म ‘ट्रिपल एक्स: रिटर्न ऑफ जेंडर केज’ भी है जो विश्व भर में हिट रही।
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मशहूर टीवी सीरियल निर्माता एकता कपूर की एक अलग ही पहचान है। कई टीवी शोज और फिल्मों को प्रोड्यूस कर चुकी एकता का सफर 'हम पांच' से शुरू हुआ थी जो आज भी जारी है। टीवी पर सास बहू के धारावाहिकों में बढ़ोत्तरी लाने वाली एकता का मानना है कि मेरे बारे में लोग जो कहते हैं उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है, मेरा परिवार मेरे साथ है इसका मतलब है कि मैं सही हूँ।
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एक्शन दृश्यों को करने के लिए आमतौर पर स्टंटमैन का इस्तेमाल होता है लेकिन स्टंट वूमैन के नाम पर सिर्फ कुछ एक ही हैं। गीता फिल्मों में बेहद खतरनाक और जानलेवा स्टंट करती हैं। गीता कहती हैं कि उन्हें इस बात का बिलकुल अफसोस नहीं है कि वो कैमरे पर नहीं दिख पातीं हैं।
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बॉलीवुड में अपनी शर्तों पर काम करने वाली कंगना वाकई में नारी शक्ति की एक मिसाल हैं. वो कहती हैं कि जिन महिलाओं के कुछ सपने होते हैं उन्हें हमारे समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता, वो स्वार्थी, परिवार का ध्यान ना रखने वाली हो जाती हैं। हमें महिलाओं को बराबर का अधिकार देने के लिए भेदभाव की सोच को बदलने की जरूरत है।
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बॉलीवुड में महिला संगीतकार की कमी हमेशा से थी, लेकिन म्यूजिक डायरेक्टर स्नेहा खनवलकर ने इस कमी को पूरा कर दिया है। एम टीवी के म्यूज़िक ट्रिपिंग के गाने ‘टुंग टुंग’ से चर्चा में आईं स्नेहा को फ़िल्म 'ओए लकी-लकी ओए' से पहचान मिली। इसके बाद “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” का संगीत देने के बाद से तो जैसे वो बॉलीवुड कि ‘इन-डिमांड’ संगीत निर्देशिका बन चुकी हैं।
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जावेद अख्तर की बेटी 'लक बाय चांस', ‘ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा’ और ‘दिल धड़कने दो’ जैसी फ़िल्में बना चुकी ज़ोया महिलाओं के सशक्तिकरण को बेहद अहम मुद्दा मानती हैं और उनका ज्यादा से ज्यादा फोकस रहता है कि अपनी फ़िल्म में महिला के किरदार को भी उतना ही मज़बूत दिखाएं जितना एक पुरुष के किरदार को वो दिखा रही हैं।
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पूर्व मिस वर्ल्ड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ना केवल बॉलीवुड की एक सफल अभिनेत्री हैं बल्कि अब वो हॉलीवुड में भी लोकप्रिय हो चुकी हैं। बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में प्रियंका ने कहा कि मैं एक महिला हूं और आज मैं, मेरी दूसरी साथी हॉलीवुड में अपनी जगह बना रहे हैं और सभी को समझ आ चुका है कि भारत में भी असीमित प्रतिभाएं हैं।