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साउथ सिनेमा खासकर कन्नड फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार अभिनेताओं में से एक यश आज किसी पहचान के लिए मोहताज नहीं है। उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर दर्शकों के दिल में एक अलग ही छाप छोड़ा है। यश मेगास्टार फिल्म केजीएफ से बने। इस फिल्म ने उन्हें न सिर्फ भारत बल्कि वर्ल्ड वाइड पहचान दिलाई। (Photo: Yash/FB)
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आज यश साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सबसे महंगे कलाकारों में से एक हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब उन्हें 50 रुपये की नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। सिर्फ इतना ही नहीं यश का असली नाम नवीन है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि उनका एक और नाम है। यश आज अपना 40वां जन्मदिन मना रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साउथ मेगास्टार यश के बारे में कुछ दिलचस्प बातें: (Photo: Yash/FB)
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नाम के पीछे कहानी
यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के एक छोटे से गांव बूवनहल्ली में हुआ था। जन्म के दौरान उन्हें दो नाम मिले। कानूनी तौर पर उनका नाम नवीन रखा गया। पूरा नाम नवीन कुमार गौड़ा है। वहीं, मां के परिवार वालों ने यानी यश के ननिहाल के लोगों ने उनका नाम यशवंत रखा। (Photo: Yash/FB) -
यश क्यों रखा
जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा था लोगों ने उन्हें छोटा और प्रभावशाली स्क्रीन नाम अपनाने की सलाह दी जिसके बाद उन्होंने अपना नाम छोटा कर यश कर लिया। (Photo: Yash/FB) -
किराने की दुकान पर भी कर चुके हैं काम
यश के पिता अरुण कुमार कर्नाटक रोडवेज में एक ड्राइवर थे और मां हाउसवाइफ। उनकी छोटी बहन भी हैं जिनका नाम नंदिनी है। यश के परिवार की एक छोटी सी किराने की दुकान भी थी जहां पर वह बचपन में हाथ बंटाया करते थे। (Photo: Yash/FB) साल 2025 में इन 7 खलनायकों का दिखा खौफ, एक्टिंग देख कांप उठे थे दर्शक -
पिता चाहते थे ये बनाना
यश को बचपन से ही अभिनय की दुनिया में आने का शौक था। स्कूल दिनों में वह नाटक और डांस प्रतियोगिताओं में खूब हिस्सा लिया करते थे। 10वीं के बाद वह स्कूल छोड़कर पूरी तरह अभिनय की दुनिया में आना चाहते थे। लेकिन पेरेंट्स इसके लिए राजी नहीं हुए। शुरुआत में उनके माता-पिता अभिनेता में करियर बनाने के सपने से खिलाफ थे। यश के पिता चाहते थे कि वह सरकार अफसर बनें। (Photo: Yash/FB) -
इस शर्त पर छोड़ा था घर
साल 2003 में यश घर वालों की रजामंदी से बेंगलुरु आ गए लेकिन इस शर्त पर अगर वह वापस घर आए तो फिर जाने नहीं दिया जाएगा। बेंगलुरु में उन्हें एक फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम मिला लेकिन सिर्फ दो दिन की शूटिंग के बाद फिल्म बंद हो गई। हालांकि, यश बेंगलुरु में ही रुक गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ 300 रुपये थे। (Photo: Yash/FB) -
सिर्फ 50 रुपये थी पहली सैलरी
यश ने प्रसिद्ध नाटककार बी. वी. करंथ के बेनाका थिएटर ज्वाइन किया जहां उन्हें पर्दे के पीछे काम मिला और इसके लिए रोजाना उन्हें सिर्फ 50 रुपये मिलते थे। कुछ समय बाद यश बैकअप एक्टर के रूप में काम करने लगे। इसके बाद साल 2004 में उन्हें एक नाटक में बलराम का मुख्य किरदार निभाने का मौका मिला। (Photo: Yash/FB) -
डेब्यू
2004 में यश ने टीवी सीरियल उत्तरायण से टेलीविजन में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने नंदा गोकुला, माले बिल्लू और प्रीति इलाद मेले जैसे अन्य कई टीवी शोज में काम किया। इसके बाद साल 2007 में उन्होंने फिल्म जंबदा हुडुगी से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इस फिल्म में यश के अदाकारी की खूब सराहना हुई। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में काम मिला। (Photo: Yash/FB) -
इस फिल्म ने बनाया मेगास्टार
यश के लाइफ का सबसे शानदार समय साल 2018 में आया जब उनकी फिल्म केजीएफ चैप्टर 1 रिलीज हुई। इस फिल्म में वह रॉकी के किरदार में नजर आए थे। उनके लुक और दमदार अदाकारी की खूब तारीफ हुई थी। सिर्फ 80 करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने करीब 250 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके दूसरे पार्ट ने 1200 करोड़ रुपये अधिक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था। (Photo: Yash/FB) संगीत के सम्राट A. R. Rahman को जब भीख मांगने के लिए कहा गया, बेहद गरीबी में बीता था बचपन