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मनोज बाजपेयी लॉकडाउन के दिनों में उत्तराखंड की हसीं वादियों को एंजॉय कर रहे हैं। यहां पर वह एक वेब सीरीज की शूटिंग के लिए आए थे लेकिन अचानक लॉकडाउन लगने से वे परिवार संग यहीं रह गए। 23 अप्रैल को मनोज पायपेजी 51 साल हो चुके हैं। आज हम आपको बॉलीवुड के संजीदा करिदार निभाने वाले इस अभिनेता के बारे में वो बातें बताने जा रहे हैं जिनके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं। मनोज आज जिस मुकाम पर हैं उसमें सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत और लंबा संघर्ष है। क्योंकि सिनेमा से उनके पूर्वजों का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहा। मौजूदा दौर में गैंग्स ऑफ वासेपुर फेम एक्टर की गिनती बॉलीवुड उन मंझे कलाकारों में की जाती है जिनके अभिनय की दुनिया दीवानी है। लेकिन मनोज की लाइफ में एक ऐसा दौर भी आया था जब वे अपने आप को खत्म कर देना चाहते थे। आइए डालते हैं मनोज की पर्सनल लाइफ पर एक नजर। (All Photos- Instagram)

इंडस्ट्री में मनोज बाजपेयी का नाम अदब से लिया जाता है लेकिन एक जमाना था जब उन्हें कोई पूछता तक नहीं था। फिल्मों में रोल तो दूर एक्टिंग इंस्टीट्यूट तक में उन्हें एडमिशन नहीं मिल रहा था। -
उस वक्त तमाम लोग नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़कर अभिनय की दुनिया में आए थे जबकि मनोज को यहां एडमिशन ही नहीं मिल पाया।
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मनोज ने दिल्ली स्थित NSD में तीन बार एडमिशन कराने की कोशिश की लेकिन उन्हें असफलता ही हाथ लगी।

एक इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी ने बताया कि दौर में मेरी आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर थी। बार-बार के रिजेक्शन से मेरे मन में खुद को खत्म करने के ख्याल आते लगे थे। मैं पूरी तरह से टूट चुका था। बाजपेयी ने बताया कि मुझे पढ़ाई के दौरान पिताजी की ओर से 200 रुपए की पॉकिट मनी मिलती थी जिसे पूरे माह चलाना पड़ता था। -
तमाम दफा रिजेक्शन के बाद भी मनोज ने हार नहीं मानी और इसी तरह प्रयासों में लगे रहे। लंबे संघर्ष के बाद उनकी मुलाकात एक्टिंग कोच बैरी जॉन से हुई।
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मनोज बाजपेयी ने अपने दोस्त के कहने पर बैरी जोन की वर्कशॉप अटेंड की थी और उसके बाद मनोज बाजपेयी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। उस संघर्ष भरी जिंदगी में बैरी जॉन मनोज की लाइफ के टर्निंग प्वाइंट बने।

जॉन की वर्कशॉप के बाद मनोज ने फिर NSD में एडमिशन लेने का प्रयास किया जिसमें वे सफल रहे। उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में बतौर शिक्षक की जॉब मिल गई थी। 
बाद में उन्होंने कई फिल्मों में बतौर सलाहकार भी काम किया। इसी बीच राम गोपाल वर्मा ने उन्हें सत्या में कास्ट किया, जिसमें उनके अभिनय को काफी सराहा गया था। फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला था।