पढ़ने-लिखने और सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। आजीवन सीखते रहने का पहलू महत्त्वपूर्ण है, जो व्यक्ति और समाज के विकास के लिए जरूरी है। ज्ञानार्जन और नवीनतम कौशल विकास की ऐसी प्रक्रिया है, जो जीवनपर्यंत चलती है। इसमें सीखने के औपचारिक और अनौपचारिक रूप शामिल होते हैं। यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति स्वयं चुनता है कि उसे क्या सीखना है, कैसे सीखना है और किस तरह की गतिविधियों का हिस्सा बनना है। मसलन- कला, संगीत, खेल, हस्तशिल्प और समाज सेवा इत्यादि। शिक्षा कोई समयबद्ध गतिविधि या खोज नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सफल जीवन का आधार है। भारत में नई शिक्षा नीति 2020 के साथ ही आजीवन शिक्षा की तरफ ध्यान केंद्रित हुआ है।
ताउम्र सीखने की प्रक्रिया में प्रौढ़ शिक्षा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके माध्यम से व्यक्ति को कौशल और ज्ञान अर्जित करने का अवसर मिलता है, जिससे उन्हें अपने जीवन की राह को आसान बनाने मदद मिलती है। वे रोजगार प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम आगे बढ़ा सकते हैं। प्रकृति के साथ सह अस्तित्व को बढ़ाने के लिए नई तकनीक को सीखने और सिखाने की जरूरत को भी समझना होगा।
साक्षरता और बुनियादी शिक्षा व्यक्ति के जीवनपर्यंत सीखने के अवसरों को आगे बढ़ाती है। देश और समाज में व्यक्ति के स्तर पर सहयोगी बनने की दिशा में निरंतर प्रयासों की जरूरत है। शिक्षा की ताकत और बुनियादी साक्षरता के प्रयासों से विकसित भारत के उद्देश्य को भी बल मिलेगा। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के आंकड़े दर्शाते हैं कि राष्ट्र की साक्षरता दर और उसकी प्रति व्यक्ति आय में गहरा संबंध होता है। इसी उद्देश्य से जीवनपर्यंत शिक्षा को विकास में सहयोगी के रूप में देखा जाता है। दूसरी ओर किसी समुदाय का गैर साक्षर होना, उस वर्ग के उत्थान में बाधा बन सकता है।
बुनियादी वित्तीय लेनदेन कर पाना, गुणवत्ता अथवा मात्रा की तुलना, नौकरियां के आवेदन फार्म भरना, समाचार मीडिया में सार्वजनिक सूचनाओं को समझना, व्यापार को संचालित करना, पारंपरिक एवं पेशेवर तरीके को बेहतर बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल तथा दिशाओं और सुरक्षा निर्देशों को समझने के लिए जीवनपर्यंत शिक्षा का होना अति आवश्यक है। आजीवन शिक्षा व्यवस्था के लिए सबसे पहले राजनीतिक इच्छाशक्ति, संगठनात्मक संरचना, प्रभावी कार्ययोजना और पर्याप्त वित्तीय सहायता का होना जरूरी है। इसके अलावा स्वयं सेवी कार्यकर्ताओं एवं संगठनों की गुणवत्तापूर्ण क्षमता संवर्धन के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी का पहलू भी जीवनपर्यंत साक्षरता कार्यक्रमों की सफलता के लिए आवश्यक है।
कुछ बातें भूल जाइए, कुछ लोगों को माफ कर दीजिए, मन भी हल्का होगा, जिंदगी भी
सकारात्मक सामाजिक बदलाव और न्याय के लिए समुदाय की भागीदारी शिक्षा के जरिए ही संभव हो पाती है। सामाजिक मुद्दों का चर्चा और विमर्श के माध्यम से समाधान निकालने की प्रक्रिया में भी साक्षरता की अहम भूमिका है। आजीवन सीखने को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से नवाचारी पहल खासकर समुदाय की भागीदारी को सुगम बनाना और प्रौद्योगिकी के सुचारु एवं लाभकारी एकीकरण को आगे बढ़ाना होगा। साथ ही बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान, व्यावसायिक कौशल विकास, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और सतत शिक्षा पर जोर देते हुए इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि कई मामलों में बच्चों और प्रौढ़ को सिखाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके, प्रशिक्षण सामग्री और शिक्षण पद्धतियों में भी सुधार की आवश्यकता होगी।
प्रौढ शिक्षा के माध्यम से लोगों को अपने कौशल और ज्ञान में सुधार करने का अवसर मिलता है, जिससे वे अपने जीवन में आसानी से आगे बढ़ सकते हैं। प्रौढ शिक्षा के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे कि प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, आनलाइन पाठ्यक्रम और सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रम। आजीवन सीखने को बढ़ावा देने के लिए हमें शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना होगा। प्रौद्योगिकी के उपयोग और वित्तीय मदद की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। साथ ही स्वयंसेवक और सामुदायिक कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित करना होगा।
हम समझते हैं” कह देना आसान है, लेकिन क्या कोई सच में किसी का दुख समझ पाता है?
इसके जरिए हम एक शिक्षित, सक्षम और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। इसके अलावा, हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसर सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध हों, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग, या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। हमें शिक्षा को अधिक सुलभ, अनुकूल और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए काम करना होगा।
आजीवन सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने से न केवल लोगों के जीवन को आसान बनाने में मदद की जा सकती है, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दी जा सकती है। इन प्रयासों के तहत शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और परिस्थितियों के अनुकूल बनाना होगा। नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके शिक्षा को प्रयोगात्मक और प्रभावी बनाना होगा तथा शिक्षा में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना होगा। शिक्षा और ज्ञान व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है। यह वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधेरे को दूर करता है और तर्कसंगत सोच विकसित करता है। शिक्षा से व्यक्ति और समाज अपने दम पर निर्णय लेने में सक्षम हो पाता है और यही क्षमता उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने में मदद करती है।
