कोहरा सड़क सुरक्षा को प्रभावित करने वाली सबसे भ्रामक और खतरनाक प्राकृतिक परिस्थितियों में से एक है। भारी वर्षा या तूफान की तरह कोहरा शोर या तीव्रता के साथ नहीं आता, बल्कि यह चुपचाप वातावरण को अपनी चादर में ढक लेता है। यह दृश्यता को अत्यधिक कम कर देता है, दूरी के आकलन में भ्रम पैदा करता है और मनुष्य की प्रतिक्रिया क्षमता को धीमा कर देता है। हर वर्ष, विशेषकर उत्तर भारत में सर्दी के महीनों के दौरान घना कोहरा राष्ट्रीय राजमार्गों, शहरी सड़कों और ग्रामीण मार्गों पर भीषण हादसों का कारण बनता है। कई वाहनों की एक साथ टक्कर, खड़े वाहनों से टकराव, तथा बसों, ट्रकों और निजी वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाएं अब लगभग रोजमर्रा की बात हो गई हैं। ऐसे में कोहरे के दौरान सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना एक तकनीकी जरूरत बन चुकी है।

कोहरे से होने वाली दुर्घटनाओं के घातक होने का एक मुख्य कारण दृश्य संकेतों का अचानक गायब हो जाना है। चालक वाहन चलाते समय दूरी, गति और सड़क की दिशा का अनुमान लगाने के लिए मुख्य रूप से अपनी दृष्टि पर निर्भर रहता है। जब कोहरे के कारण दृश्यता कुछ मीटर तक सीमित हो जाती है, तो अनुभवी चालक भी समय पर प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो जाते हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज गति से चलने वाले वाहन अक्सर धीमी गति से चल रहे या सड़क किनारे खड़े वाहनों, अवरोधकों या पैदल यात्रियों से टकरा जाते हैं। ऐसी सूरत में पीछे से आने वाले चालक आगे की स्थिति को समय रहते नहीं देख पाते, जिससे शृंखलाबद्ध टक्कर होती हैं। रात के समय यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब अंधेरा और कोहरा मिलकर वाहनों की साधारण रोशनी को निष्प्रभावी बना देते हैं और कई बार प्रकाश का परावर्तन दृश्यता को और खराब कर देता है।

इस संकट में तकनीकी कमियां भी हादसों के लिए जिम्मेदार हैं। कई राष्ट्रीय राजमार्गों सहित देश की अधिकांश सड़कों पर दृश्यता बढ़ाने वाली आधुनिक संरचनाओं का अभाव है। सड़क पर बनी परावर्तक रेखाएं उचित रखरखाव के अभाव में जल्दी फीकी पड़ जाती हैं। संकेतक बोर्ड या तो परावर्तक नहीं होते या धूल, मिट्टी और झाड़ियों से ढके रहते हैं। हालांकि, नियमों के अनुसार वाहनों में ‘फाग लैंप’ होना चाहिए, लेकिन बड़ी संख्या में वाहनों में ये या तो लगे नहीं होते या काम नहीं करते हैं। जहां तकनीक उपलब्ध है, वहां भी उसका प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और चालकों में जागरूकता की भारी कमी देखने को मिलती है। उपलब्ध समाधानों और जमीनी हकीकत के बीच की यही खाई लगातार लोगों की जान ले रही है।

आधुनिक तकनीक कोहरे से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कई प्रभावी उपाय प्रदान करती है। ‘इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम’ (आइटीएस) इस दिशा में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। ये प्रणालियां सेंसर, कैमरे और वास्तविक समय के आंकड़ों की सहायता से मौसम तथा यातायात की स्थिति पर लगातार निगरानी रखती हैं। परिवर्तनीय संदेश संकेतक बोर्ड चालकों को आगे कोहरे की तीव्रता की जानकारी दे सकते हैं, गति कम करने की सलाह दे सकते हैं और दुर्घटना या जाम की चेतावनी भी दे सकते हैं। विकसित देशों में व्यस्ततम राजमार्गों पर कोहरे की सघनता का पता लगाने वाले सेंसर लगाए गए हैं, जो अपने आप चेतावनी संकेत सक्रिय कर देते हैं और वाहनों की गति सीमा को समायोजित कर देते हैं। यदि भारत के कोहरा-प्रभावित राजमार्गों पर ऐसी प्रणालियां स्थापित की जाएं, तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

वाहन-आधारित तकनीकें भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण हैं। ‘एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम’ जैसे- स्वत: आपातकालीन ब्रेकिंग, लेन से बाहर जाने की चेतावनी और अनुकूल क्रूज कंट्रोल, कम दृश्यता और धीमी मानवीय प्रतिक्रिया की भरपाई कर सकते हैं। इंफ्रा-रेड कैमरे और थर्मल इमेजिंग प्रणाली दृश्य सीमा से परे बाधाओं और जीवित प्राणियों का संकेत दे सकती हैं। सड़क की रूपरेखा और आधारभूत संरचना को भी जलवायु की वास्तविकताओं के अनुरूप विकसित करना होगा।

राजमार्गों की योजना बनाते समय कोहरा-प्रवण क्षेत्रों को विशेष ध्यान में रखना आवश्यक है। उचित जल निकासी, सड़क किनारे परावर्तक संकेत, प्रकाशित लेन चिह्न और ‘रंबल स्ट्रिप्स’ कम दृश्यता में भी चालकों को साफ संकेत प्रदान कर सकते हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले एलईडी स्टड कोहरा भरी रातों में लेन और मोड़ों को स्पष्ट रूप से दर्शा सकते हैं। ओवरब्रिज, अंडरपास और दुर्घटना-प्रवण हिस्सों पर बेहतर रोशनी तथा स्पष्ट संकेतक अनिवार्य होने चाहिए।

मानवीय व्यवहार इस पूरी समस्या में निर्णायक भूमिका निभाता है। कई चालक कोहरे में भी असुरक्षित गति से वाहन चलाते हैं। चालक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कोहरे में सुरक्षित ड्राइविंग की विशेष तकनीकों पर जोर दिया जाना चाहिए। अवैध रूप से खड़े वाहन, सड़क किनारे अतिक्रमण और अनधिकृत ढाबे अचानक रुकावटें पैदा करते हैं और कोहरे में जानलेवा साबित होते हैं।

जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता भी उतनी ही आवश्यक है। सड़क सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी है। यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना, घने कोहरे में अनावश्यक रात्रि यात्रा से बचना और वाहन की तकनीकी स्थिति सुनिश्चित करना कई जिंदगियां बचा सकता है। कोहरे से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं प्रकृति की देन नहीं, बल्कि तकनीकी कमी, कमजोर योजना, ढीले प्रवर्तन और जागरूकता के अभाव का परिणाम हैं।