महाराष्ट्र के दिग्गज नेता एकनाथ खड्से ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़ कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मौजूदगी में एकनाथ खड्से ने एनपीसी का दामन थामा है। एनसीपी में शामिल होने के बाद खडसे ने कहा कि अगर बीजेपी ने हमारे पीछे ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को लगाया तो, हम सीडी चलाएंगे। खडसे ने पिछले दिनों कहा था कि उन्होंने बीजेपी छोड़ने और एनसीपी में शामिल होने का फैसला किया क्योंकि उन्हें लग रहा था कि जब तक बीजेपी में देवेंद्र फडणवीस हैं, उन्हें “कभी न्याय नहीं मिलेगा..” उन्होंने फडणवीस पर उनके साथ “गंदी राजनीति” करने का भी आरोप लगाया।
एकनाथ खडसे 40 साल तक बीजेपी में रहे। साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। उस वक्त एकनाथ खडसे की जगह उनकी बेटी को बीजेपी का टिकट जरूर मिला, लेकिन वो हार गयीं. एकनाथ खडसे बेटी की हार का जिम्मेदार भी देवेंद्र फडणवीस को ही ठहराते रहे हैं।
महाराष्ट्र के वित्त मंत्री रह चुके एकनाथ खडसे पर जमीन कब्जाने का आऱोप तक लग चुका है। एकनाथ खडसे पर पुणे में सरकारी एमआईडीसी की करीब 40 करोड़ रुपए की जमीन को 3.75 करोड़ में पत्नी और दामाद के नाम पर खरीदने का आरोप लगा था। यह आरोप लगने के बाद उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ा था। उनपर पहले भी जलगांव में गलत तरीके से सरकारी जमीन खरीदने का आरोप लग चुका है।
इसके अलावा खड़से के मोबाइल पर अंडरवल्र्ड डॉन दाउद इब्राहिम के पाक स्थित घर से फोन आने का आरोप लगा था। इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया अनशन पर बैठ गई थीं। एक चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि खडसे ने व्हिसल ब्लोवर हेमंत गवांदे के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया था।
लेवा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले खडसे ने खुद को ओबीसी लीडर के तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति में पहचान बनाई। खडसे ने 1995-1999 महाराष्ट्र राज्य सरकार में शिवसेना-भाजपा गठबंधन के नेतृत्व में वित्त और सिंचाई दोनों विभागों को संभाला। उन्होंने नवंबर 2009 से अक्टूबर 2014 तक विपक्ष के नेता के रूप में भी काम किया।
