एक रिसर्च में यह बताया गया है कि पुरुषों में शुक्राणुओं की पर्याप्त मात्रा न सिर्फ उनकी फर्टिलिटी के लिए बेहतर होती है बल्कि यह उन्हें कई बीमारियों को रोकने में भी मदद कर सकती है। शोध में यह भी कहा गया है कि पुरुषों में कम शुक्राणु सिर्फ बांझपन का कारण नहीं बनते बल्कि यह उनमें कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ाते हैं। इस शोध से जुड़े एक प्रोफेसर अल्बर्टो फर्लिन बताते हैं कि हमारे अध्ययन के मुताबिक पुरुषों में स्पर्म की कम मात्रा की वजह से उनमें मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्या, दिल संबंधी बीमारियों का जोखिम तथा हड्डियों के द्रव्यमान में कमी की समस्या हो सकती है।
फर्लिन कहते हैं कि इन्फर्टाइल पुरुषों में स्वास्थ्य संबंधी खतरे ज्यादा होते हैं। यह उनकी उम्र भी कम करते हैं। ENDO 2018:इंडोक्राइन सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत किए गए इस शोध में बांझ जोड़ों तकरीबन 5177 पुरुष पार्टनर्स ने भाग लिया था। जिसमें उनके स्पर्म और उनकी सेहत को लेकर व्यापक अध्ययन किया गया था। इसमें उनके प्रजनन संबंधी हार्मोन्स और मेटाबॉलिक मानकों का भी मापन किया गया था। रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया कि लो स्पर्म काउंट वाले पुरुषों में सामान्य शुक्राणुओं की संख्या वाले पुरुषों के मुकाबले बॉडी फैट, हायर ब्लड प्रेशर और बैड कोलेस्ट्रॉल होने की संभावना 1.2 गुना ज्यादा थी।
इतना ही नहीं, उनमें डायबिटीज, दिल संबंधी बीमारी और स्ट्रोक होने का भी जोखिम ज्यादा पाया गया। कम शुक्राणु वाले पुरुषों में इंसुलिन प्रतिरोध की भी समस्या देखी गई है जो डायबिटीज होने के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा शोध में बताया गया है कि लो स्पर्म काउंट वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन के स्तर भी काफी कम रहता है। इससे उनके हड्डियों के द्रव्यमान में कमी आती है। यह बाद में ओस्टियोपोरोसिस का भी कारण बन सकती है। शोध का कहना है कि लो स्पर्म काउंट पुरुषों के दिल और मेटाबॉलिज्म संबंधी स्वास्थ्य के बदतर होने की वजह हो सकता है।
