World Book Fair 2020: विश्व पुस्तक मेले में अंजू शर्मा के कहानी संग्रह ‘सुबह ऐसे आती है’ का लोकार्पण भावना प्रकाशन के स्टॉल पर हुआ। सुभाष नीरव, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, कमलेश पांडे, विवेक मिश्र, आकांक्षा पारे, नीरज मित्तल, अर्चना चतुर्वेदी, सुनीता शानू, योगिता यादव, नीलिमा शर्मा, शोभा रस्तोगी, अनिता दुबे, नीरज शर्मा, राजीव तनेजा, गीता पंडित कार्यक्रम में मौजूद थे। कथाकार आकांक्षा पारे ने इस संग्रह की कहानियों की स्त्री की सशक्त सोच पर बात करते हुए इन्हें एक संपूर्ण इंसान की कहानियां बताया। विवेक मिश्र ने इन कहानियों को उम्मीद की कहानियां बताते हुए इनके कथ्य और शिल्प पर बात रखी। सुभाष नीरव ने भी इन कहानियों को परिपक्व बताते हुए विस्तार से अपनी बात रखी।
रोचक अंदाज में पुराने गांव का शास्त्रीय अध्ययन
विश्व पुस्तक मेले में वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर ज्ञान चंद बागड़ी के नए उपन्यास ‘आखिरी गांव’ पर लोकार्पण और परिचर्चा की गई। वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने वक्ताओं का स्वागत किया।
ज्ञानचंद बागड़ी ने बताया की जो रीति रिवाज बदलते जा रहे हैं उनका पुन: स्मरण किया जाना नई पीढ़ी के लिए अति आवश्यक है, इसी उद्देश्य से इस उपन्यास की रचना की गई है। कवि कृष्ण कल्पित के अनुसार यह उपन्यास पुराने गांव का समाजशास्त्रीय अध्ययन बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है। ईश मधु तलवार ने भी इस उपन्यास को भारतीय धरोहर की रक्षा करने वाला और नई पीढ़ी के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपन्यास माना।
कथा सिर्फ यथार्थ से नहीं निभती, कल्पना का भी योगदान: मृदुला सिन्हा
महाभारत के अमर माने जाने वाले चरित्र अश्वत्थामा पर आधारित यश पब्लिकेशंस से प्रकाशित और राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक ‘साक्षी है समय का’ विश्व पुस्तक मेले के हॉल नं 12ए के लेखक मंच पर लोकार्पण हुआ। पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा, पत्रकार बलदेवभाई शर्मा, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, प्रो कपिल कपूर, मुख्य अतिथि नंद किशोर पांडेय और यश पब्लिकेशंस के निदेशक राहुल भारद्वाज व जतिन भारद्वाज मौजूद थे। लेखक राजीव रंजन ने बताया कि ‘साक्षी है समय का’ केंद्रीय पात्र अश्वत्थामा हैं, जो अतीत और वर्तमान के मध्य सेतु की पृष्ठभूमि को दर्शाता है।
पुस्तक में इतिहास के विभिन्न कालखंडों, उनकी मुख्य घटनाओं, कहे-अनकहे चरित्रों को सजीव किया गया है। यह उपन्यास छह खंडों में है। मृदुला सिन्हा ने कहा कि यह उपन्यास एक सामाजिक लेखक की कलम से निकला है। यह भी जानना जरूरी है कि कथा सिर्फ यथार्थ से नहीं निभती, उसमें कल्पना का भी बड़ा योगदान है जो राजीव रंजन की लेखन शैली में बखूबी दिखती है।

