राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित देश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर विभिन्न दलों द्वारा चिंता जताए जाने के बीच पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि बेजिंग को वायु प्रदूषण से निपटने में 15 साल लगे, हम इससे कम समय में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाएंगे। लोकसभा में वायु प्रदूषण एवं जलवायु संकट पर नियम 193 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए जावडेकर ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जन आंदोलन की जरूरत है। यह कोई राजनीतिक सवाल नहीं है। इससे हम सभी को मिल कर निपटना है और इसके लिए सतत प्रयास जरूरी है। मंत्री ने कहा कि बेजिंग को वायु प्रदूषण से निपटने में 15 साल लगे हैं, हम इससे कम समय में इसे (वायु प्रदूषण को) मात देंगे।
जावडेकर दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में वायु प्रदूषण के बारे में सदस्यों की चिंताओं पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस समस्या पर काबू पाने के लिए सरकार ने विभिन्न कदम उठाए हैं और उनका असर भी हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण और जलवायु संकट में संबंध है। सरकार 2030 तक देश में कुल ऊर्जा उपयोग का 40 फीसद नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा से करने की दिशा में काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री ने इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि हर शहर की समस्या के अलग-अलग कारण हैं और उन्हें किसी एक तरीके से हल नहीं किया जा सकता, ऐसे में हम हर शहर के हिसाब से काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए सरकार ने कारणों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के कारणों में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन जनित उत्सर्जन, सड़क और मिट्टी की धूल, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, बायोमास और कचरा जलाना शामिल हैं। वाहनों से होने वाले प्रदूषण का जिक्र करते हुए जावडेकर ने कहा कि एक अप्रैल 2020 से र्इंधन के साथ साथ वाहनों में बीएस-6 मानक लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सड़कों पर भीड़ को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और सड़कों में सुधार करने पर भी जोर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण करने की पहल के तहत फर्नेस आॅयल पर प्रतिबंध लगाया गया है जबकि उत्सर्जन मानकों में बदलाव किए गए हैं।

