नगरोटा में सेना के शिविर पर हमले के मद्देनजर सख्ती से पेश आते हुए भारत ने आज स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद जारी रहने के माहौल में पाकिस्तान के साथ वार्ता नहीं हो सकती, जिसे द्विपक्षीय संबंध में ‘नयी सामान्य स्थिति’ के रूप में भारत कभी नहीं स्वीकार करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यह भी कहा कि अगले कदमों पर फैसला करने से पहले सरकार नगरोटा हमले के बारे में विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं इस बात पर जोर देना चाहुंगा कि सरकार ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उसे जो भी जरूरी लगेगा वह किया जाएगा।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या अमृतसर में तीन और चार दिसंबर को होने वाले ‘हार्ट आॅफ एशिया’ सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता होगी, उन्होंने बताया, ‘‘हमें द्विपक्षीय बैठक के लिए पाकिस्तान से कोई अनुरोध नहीं मिला है।’’ स्वरूप ने कहा, ‘‘भारत हमेशा से बातचीत के लिए तैयार रहा है, लेकिन बेशक यह वार्ता आतंकवाद के जारी रहने के माहौल में नहीं हो सकती। भारत जारी आतंकवाद को द्विपक्षीय संबंध में नयी सामान्य स्थिति के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेगा।’’ सम्मेलन से दो दिन पहले भारत की तीखी टिप्पणी आई है। सम्मेलन में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज करेंगे। इससे पहले पाक मीडिया में आई खबरों में अधिकारियों के हवाले से बताया गया था कि अफगानिस्तान पर होने वाले इस सम्मेलन से इतर कोई द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी रविवार को संयुक्त रूप से मंत्रीस्तरीय वार्ताओं की शुरूआत करेंगे जहां भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वित्त मंत्री अरूण जेटली करेंगे क्योंकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अस्वस्थ हैं। पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए स्वरूप ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसका सीमा पार से आतंकवाद चलाने का लंबा इतिहास है और जिसे वह अपनी शासन नीति का औजार मानता है तथा इसी वजह से इस्लामाबाद शेष अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अलहदा है। ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद हमले बढ़ने की आलोचना पर स्वरूप कहा, ‘‘उस वक्त हमारा आंकलन था कि सशस्त्र आतंकवादियों के ठिकाने के बारे में खुफिया जानकारी पर आधारित यह एक आसन्न खतरा था। ये आतंकी नियंत्रण रेखा पार के उस तरफ से घुसपैठ करने और हमारे क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधि करने को तैयार थे।
स्वरूप ने कहा कि इस आसन्न खतरे को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के जरिए सफलतापूर्वक शांत कर दिया गया। ‘‘हमें सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि क्या हुआ बल्कि यह भी देखना चाहिए क्या नहीं हुआ, आतंकवादियों को सफलतापूर्वक काबू कर क्या टाला जा सका।’’ पाक के नये सेना प्रमुख की निुयक्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है। भारत पाकिस्तान के बारे में कोई राय उसके बर्ताव और पिछले रिकार्ड से करेगा, ना कि लोगों के बदले जाने से।
उरी हमले की संयुक्त जांच के पाकिस्तान के सुझाव पर स्वरूप ने कहा कि ऐसा अतीत में हुआ है और भारत के द्वारा मुहैया कराए गए साक्ष्य पर कार्रवाई करने की बजाय इस्लामाबाद विशुद्ध दुष्प्रचार साजिश में शामिल रहा। भारत का मानना है कि उरी हमला को पाक आधारित आतंकवादियों ने अंजाम दिया। उन्होंने बताया, ‘‘पाकिस्तान ने एक अंतरराष्ट्रीय जांच की अपील की है, हमने कहा कि हम उनकी घरेलू जांच के साथ भी खुश हैं। जब हम आपको पाकिस्तान से आए आतंकवादियों के उंगलियों के निशान, आतंकवादियों का डीएनए दे रहे हैं, तो पाकिस्तान राष्ट्रीय डेटाबेस से उसका मिलान क्यों नहीं कर सकता।’’
प्रवक्ता ने कहा कि यह सबसे आसान काम होगा। लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा करने से इनकार किया और इसके बजाय विशुद्ध दुष्प्रचार साजिश में लगा रहा। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान उरी हमलों के पीछे मौजूद लोगों का पता लगाने के लिए गंभीर है तो उसे पहले मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को कठघरे में खड़ा करना चाहिए। इसके अलावा उसे पठानकोट वायुसेना ठिकाना हमले का ब्योरा भी भारत के साथ साझा करना चाहिए जिसके लिए पाक से एक संयुक्त जांच टीम ने देश की यात्रा की थी।
स्वरूप ने कहा कि भारत ने कई जघन्य आतंकी हमलों का सामना किया है। उन्होंने भारतीय संसद, कालुचक नरसंहार, 2005 दिल्ली बम विस्फोट, साल 2008 में रामपुर के सीआरपीएफ शिविर पर हमला, मुंबई हमले के अलावा पठानकोट वायुसेना ठिकाना हमला और उरी हमले का जिक्र करते हुए यह कहा। उन्होंने कहा कि ये हमले सीमा पार से आतंकवाद को प्रायोजित करने में पाकिस्तानी मिलीभगत की याद दिलाते हैं, जिसका ताजा उदाहरण नगरोटा हमला है। उन्होंने पाकिस्तान के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि भारत ने दक्षेस सम्मेलन के आयोजन में रोड़ा अटकाया था।

