नरेंद्र मोदी सरकार के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने के फैसले के खिलाफ संसद में कांग्रेस आक्रामक रूख अपनाए हुए है। इसी के चलते राज्यसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन विमुद्रीकरण के फैसले पर चर्चा हुई। कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत आनंद शर्मा ने की। बताया जाता है कि इससे पूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम नाराज हैं। नोटबंदी को लेकर बहस की शुरुआत चिदम्बरम खुद करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सरकार के दावों का जवाब देने के लिए बाकायदा पॉइंट भी तैयार कर लिए थे। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आनंद शर्मा को चुना। सूत्रों के अनुसार आनंद शर्मा को चुने जाने के पीछे तर्क दिया गया कि वे हिंदी बोल लेते हैं। हिंदी में बोलने के कारण कांग्रेस का रूख ज्यादा मजबूती से रखा जाएगा और इससे ज्यादा लोगों तक पहुंच भी होगी। आनंद शर्मा को अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनावों को देखते हुए चुना गया था। साथ ही वे यूपीए-2 के कार्यकाल में वाणिज्य मंत्री भी थे। लेकिन आनंद शर्मा अपने भाषण से प्रभावित करने में नाकाम रहे।
सूत्रों का कहना है कि आनंद शर्मा के अप्रभावी भाषण के बाद कई कांग्रेस नेताओं में खुशी है। वहीं चिदम्बरम राज्य सभा के लिए तैयार किए गए भाषण का उपयोग टीवी इंटरव्यू में कर रहे हैं। यहां पर वे अपने पॉइंट्स के जरिए सरकार के फैसले को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं। राज्य सभा में भाषण के दौरान आनंद शर्मा ने कहा था कि बीजेपी पर आरोप लगाया कि उन्होंने नोट को जारी करने से पहले गोपनीयता नहीं रखी और अपने जानने वालों के पैसों को पहले ही बैंक में डलवा दिया। साथ ही 2000 रुपये के नए नोट को लेकर भी सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा, ”जो नया 2000 का नया नोट लाया गया है ये बिल्कुल बचपन में चूरन वाली पुड़िया मिलती थी वैसा है।’’ वहीं चिदम्बरम ने अलग-अलग इंटरव्यू में कहा कि केवल विमुद्रीकरण के जरिए कालेधन की समस्या को दूर नहीं किया जा सकता। ‘
उन्होंने साथ ही सवाल किया कि क्या 500 और 1000 रुपये के नोट बैन किए जाने की जानकारी रिजर्व बैंक को दी गई थी। पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आरबीआई के अधिकारियों को इस बारे में बताया गया। साथ ही कहा कि मुख्य वित्तीय सलाहकार से भी इस बारे में बात नहीं की गई। हालांकि उन्होंने सरकार की मंशा का समर्थन किया लेकिन कहा कि यह तरीका सही नहीं है।
पीएम नरेंद्र मोदी के विमुद्रीकरण के एलान के बाद से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी इस फैसले के खिलाफ अगुवाई कर रहे हैं। वे दो बार बैंकों की लाइन में लगकर नोट बदलवाने गए। इसके अलावा उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों और सब्जी विक्रेताओं से भी उनकी परेशानियों के बारे में पूछा।
