सूखा पड़ने से फसल बर्बाद होने पर जब किसान आत्महत्या कर रहे थे, तब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार शाही उत्सव मना रही थी।जिसमें नेताओं को 17-1700 सौ रुपये थाली के लंच की व्यवस्था रही। यह आयोजन हुआ था 25 अक्टूबर 2017 को। मौका था राज्य सचिवालय भवन यानी ‘विधान सौध’ के 60 साल पूरे होने डायमंड जुबली सेरेमनी ( हीरक जयंती) का। सूखे से पैदा हुए संकट के बावजूद सूबे में पिछले साल हुआ यह खर्चीला आयोजन मौजूदा समय चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। विपक्ष इसके जरिए कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार पर जनहितों को लेकर उदासीन होने का आरोप लगा रही है।
सरकार ने विधानसभा भवन में उत्सव का आयोजन तब किया, जब कि सूखे से राज्य की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही थी। फसल बर्बाद होने पर लगातार किसानों के आत्महत्या करने की खबरों के बाद केंद्र सरकार ने 29 जून 2017 को सूखाग्रस्त कर्नाटक को 795 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। इससे पिछले साल राज्य में सूखे के हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद बयान जारी कर कहा था कि राज्य में सूखे के कारण 25 हजार करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई। तब कर्नाटक सरकार ने 4702.54 करोड़ का पैकेज मांगा था। एकआंकड़े के मुताबिक सूखे के चलते कर्नाटक में करीब एक हजार किसानों के आत्महत्या की थी।
यूं बहाया गया पैसाः रिपब्लिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 अक्टूबर 2017 को सिद्धारमैया सरकार की ओर से आयोजित इस पार्टी में कुल 4.5 करोड़ रुपये खर्च हुए। भवन की फूलों से सजावट पर 30 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं दो करोड़ से विधान सौंध भवन की फिल्म बनाने और दस मिनट की एनीमेशन मूवी बनाने में चार लाख रुपये बहाए गए। नेताओं को महंगा खाना खिलाया गया। लंच में भी आम-खास का भेदभाव करते हुए तीन कटेगरी बनी। वीवीआईपी गेस्ट को 1700 रुपये थाली का खाना तो वीआइपी के लिए 1300 और आम आदमी के लिए 819 रुपये थाली की व्यवस्था थी। यही नहीं आयोजन के प्रचार-प्रसार में ही एक करोड़ रुपये लुटा दिए गए।
DIAMOND JUBILEE CELEBRATION OF VIDHAN SOUDHA (25/10/2017) BANGALORE, KARNATAKA.@TheOfficialSBI @BlrCityPolice pic.twitter.com/3LUcfWsfBM
— AMALENDU HAIT (@AMALENDUHAIT1) October 27, 2017
आयोजन पर पहले भी मच चुका है घमासानःपिछले साल जब भारी-भरकम खर्च से डायमंड जुबली सेरेमनी आयोजित हो रही थी, तब भी इस पर सवाल उठे थे। मशहूर कन्नड़ एक्टिविस्ट और पूर्व राज्यसभा सदस्य पाटिल पुतप्पा ने कहा था-जब राज्य कई साल से सूखा झेल रहा हो, तब ऐसे आयोजन करना जनता के धन की बर्बादी है। बता दें कि उस वक्त राज्य सरकार ने कुल 26 करोड़ से आयोजन का प्रस्ताव रखा था। इस धनराशि पर सवाल उठने बाद कटौती हुई थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन सौ विधायकों को सोने के बिस्कुट और सचिवालय कर्मचारियों को सिल्वर के गिफ्ट उपहार में दिए गए थे। एक सोने की बिस्कुट की कीमत 50 हजार रुपये थी।
क्या है कर्नाटक सौधः यह राजधानी बेंगलुरु का सबसे ऊंचा भवन है। जिसकी ऊंचाई 46 मीटर है। ईंट और पत्थरों से निर्मित यह भवन उत्कृष्ण निर्माण शैली का नमूना है। इस भवन का इस्तेमाल राज्य सचिवालय और विधानसभा के रूप में किया जा रहा है। खास बात है कि सार्वजनिक अवकाश और रविवार के दिन इसे रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है।
अन्य राज्यों में हुए शाही खर्चेः टैक्सपेयर्स के पैसे से शाही आयोजन और दावतों का मामला कर्नाटक तक सीमित नहीं है। 11 और 12 फरवरी 2016 को दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार की वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से दी गई दावत पर हंगामा मच चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह दावत दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन ने आयोजित की थी।इस दावत में 80 प्लेट खाने का बिल 11 लाख रुपये भुगतान की चर्चा रही। एक प्लेट थाली की कीमत 16 हजार रुपये थी। इस पर जब विपक्ष ने हंगामा खड़ा किया था, तब उपमुख्मंत्री मनीष सिसौदिया ने बचाव में कहा था कि जितनी धनराशि प्रचारितकी जा रही है, उतने का भुगतान नहीं हुआ।हाल में एक आरटीआई के जवाब में उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार के शाही खर्चे का भी खुलासा हुआ। 18 मार्च 2017 से 19 दिसंबर 2017 के बीच सरकार ने मेहमानों को चाय-नाश्ता कराने में 68 लाख से ज्यादा रुपये खर्च कर दिए।

