पश्चिम बंगाल भाजपा की विधायक और पार्टी महासचिव अग्निमित्रा पॉल के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य विधानसभा में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी विधायक और नेताओं का कहना है कि मालदा में महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है और सरकार चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने बाद में विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। विधायकों ने कहा कि स्पीकर ने कहा है कि इस पर बाद में चर्चा करेंगे।

अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “राज्य विधानसभा में हमने उन मुद्दों पर बोलने की कोशिश की जो बंगाल के लोगों और महिलाओं से संबंधित हैं। आज हम मालदा घटना पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन स्पीकर ने कहा कि नहीं, हम इस पर चर्चा नहीं कर सकते, शायद बाद में मैं फैसला करूंगा… हमने सदन के अंदर और बाहर निकलने पर मीडिया के सामने विरोध किया।

उन्होंने कहा, “अगर सीएम ममता बनर्जी मणिपुर घटना की निंदा कर सकती हैं… तो मालदा घटना के बारे में क्यों नहीं?… हर दिन महिलाओं पर हमले हो रहे हैं क्योंकि कोई आरोप पत्र नहीं है, और पुलिस एफआईआर नहीं लेती है। दिन के अंत में वे कहेंगे कि हम सबसे सुरक्षित राज्य हैं क्योंकि कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।”

अग्निमित्रा पॉल ने बताया, “हमने मालदा में दो आदिवासी महिलाओं को पीटे जाने और महिलाओं के अन्य मुद्दों को लेकर विधानसभा में चर्चा की मांग की, लेकिन हमें इसकी इजाज़त नहीं मिली। जिसे लेकर हमने विरोध प्रदर्शन किया। हम मणिपुर की घटना को भी ग़लत ठहरा रहें हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की बेटियों की भी बात की जाए।”

क्या है मालदा की घटना

18 जुलाई को मालदा बाजार में कथित तौर पर दो आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनके साथ मारपीट की गई थी और बाद में उन्हें हंगामा करने के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। मंगलवार (25 जुलाई) को उन्हें जिला अदालत ने जमानत दे दी। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें हंगामा करने के फर्जी मामले में गिरफ्तार किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 जुलाई को दो आदिवासी महिलाएं स्थानीय उपज बेचने के लिए मालदा के बाजार में गई थीं, जहां कथित तौर पर चोरी के संदेह में अन्य महिला व्यापारियों ने उन पर हमला कर दिया। पुलिस ने कहा कि महिलाओं को कथित तौर पर निर्वस्त्र किया गया और उनके साथ मारपीट की गई थी। बाद में महिलाएं वहां से भाग गईं लेकिन शिकायत दर्ज नहीं कराई। व्यापारियों ने भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।”