राष्ट्रीय राजधानी में शनिवार को न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अब दिल्ली में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 11 जनवरी से दिल्ली सहित देश के अधिकांश हिस्सों में शीतलहर होगी अगले 24 घंटे धुंध भरे हो सकते हैं।

मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण शहर में तीन जनवरी से लगातार न्यूनतम तापमान सामान्य तापमान से अधिक बना हुआ है। सफदरजंग वेधशाला ने शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 9.6 डिग्री सेल्सियस, गुरुवार को न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो कि पिछले चार वर्षों में जनवरी में सबसे ज्यादा था। वहीं पालम में आज न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री, रिज में 10.3, लोधीरोड मे 09.6 डिग्री व पीतमपुरा में 12.3 डिग्री सेल्सियस रहा।

मौसम विभाग के उत्तर क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के ऊपर बादल छाए रहने की वजह से न्यूनतम तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है क्योंकि शनिवार से बर्फीले पहाड़ों से उत्तरपश्चिमी हवाएं मैदानी इलाकों की ओर चलनी शुरू हुई हैं। साथ ही आने वाले दिनों में बादल भी छंटेंगे। इससे तापमान में गिरावट होगी।

पंजाब, हरियाणा, उत्तरी और पूर्वी राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में घना कोहरा छाया रह सकता है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में अगले 24 घंटों के दौरान घना कोहरा रहने की संभावना है। इन जिलों में रहेगा घना कोहरा मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दो दिनों में घना कोहरा भी छाया रह सकता है।

इन इलाकों में गिरेगा तापमान
पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत व देश के अन्य हिस्सों में तापमान में बढ़ोत्तरी का सिलसिला जल्द थमेगा और इस कारण क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी बढ़ेगी। मौसम केंद्र ने इसकी जानकारी दी। पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर प्रदेश में तापमान में बढ़ोत्तरी जल्द थमेगा और दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब,हरियाणा व आसपास के इलाकों में कड़ाके की सर्दी बढ़ेगी। उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 दिनों की कमी आने की संभावना है। कुछ हिस्सों में शीतलहर जैसी स्थितियाँ फिर से पैदा हो सकती हैं।