उत्तर प्रदेश के जौनपुर के बदलापुर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के (भाजपा) विधायक रमेश मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा विधायक एक भूमि पूजन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे और यहां उन्होंने कथित तौर से पूजन सामग्री को लात मारा। इस संबंध में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। जो वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद है उसमें नजर आ रहा है कि विधायक अपने बॉडीगार्ड के साथ एक स्थल पर पहुंचते हैं, जहां पहले से कुछ कुर्सियां रखी हुई हैं। विधायक यहां आकर पूछते हैं कि क्या कार्यक्रम है यहां पर आज?

इसके बाद वो बीडीओ को बड़े ही रौबदार आवाज में बुलाते हैं ‘ऐ बीडीओ इधर आओ..क्या कार्यक्रम है यहां पर’ इसके बाद बीडीओ उन्हें कुछ बताते हैं और फिर नाराज विधायक चिल्लाने लगते हैं कि पत्थऱ कहां है लाओ पत्थर लाओ इधऱ,,इसके बाद अचानक वो वहां लोगों के बैठने के लिए रखे गए सामानों को लात से मारने लगते हैं।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। सोनू दुबे ओझा नाम की एक यूजर ने लिखा है कि ‘अपनी तमीज खोज रहे हैं विधायक जी। पूजा सामग्री का अनादर करना कहाँ के संस्कार है, शर्मसार है …’

राहुल रक्षित नाम के एक अन्य यूजर ने लिखा है कि ‘नेता लोग को ये सब करने की हिम्मत है क्योंकि सब भ्रष्ट लोगों के कब्जे में पुलिस है औऱ पुलिस भ्रष्ट लोगों के इशारों पर नाचती है।’

‘News 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को धनियामऊ शहीद स्मारक के प्रवेश द्वार के उद्घाटन का कार्य जिलाधिकारी दिनेश कुमार ने पहले से निर्धारित किया था। कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर थीं लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले मौके पर पहुंचे स्थानीय विधायक रमेश मिश्रा जोर-जोर से चिल्लाने लगे कि ‘मुझे कार्यक्रम की जानकारी क्यों नही दी गयी। इसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों से अभद्र भाषा मे बात की। इसके बाद शिलापट को खोजने लगे। शिलापट न मिलने पर हवन के लिए बनाए गए बेदी के किनारे बिछाए गए गद्दों को पैर मारकर फेंक दिया।

हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद विधायक ने सफाई भी दी है। उन्होंने बताया कि वे स्थानीय विधायक हैं और उनकी ही कोशिश से शहीद स्मारक के प्रवेश द्वार का सौन्द्रीयकरण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘लोगों से मुझे पता चला कि बिना उन्हें आमंत्रित किये यह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसके बाद मैं मौके पर पहुंचा और आमंत्रित न किए जाने का कारण पूछा…शिलापट पर भी मेरा नाम नहीं था।