अमूमन हर साल इस मौसम में ठंड अपने पूरे रंग में होती है और इस साल भी अब यह अपने तेवर में दिखने लगी है। लेकिन पिछले महीने अन्य सालों की अपेक्षा जिस तरह काफी ठंड महसूस की गई थी, उससे यही लग रहा था कि इस बार मौसम की सामान्य गति के मुकाबले यह पहले आ गई है। फिर हवा में नरमी आई। मगर अब ठंड बढ़ने के साथ-साथ आम जनजीवन में इसके साथ जुड़ी चिंताएं भी सतह पर आ गई हैं।

पिछले दो-तीन दिनों से दिल्ली में न केवल तापमान में तेजी से गिरावट आई है, बल्कि अब घना कोहरा पड़ने लगा है और ठंडी तेज हवा की वजह से ठिठुरन भी बढ़ गई है। हालांकि मौसम के सामान्य चक्र के मुताबिक अभी अगले करीब एक महीने तक ठंड की स्थिति को बने रहने की ही आशंका है, लेकिन सोमवार को जिस तरह घना कोहरा छाया दिखा, अगर उसमें और ज्यादा बढ़ोतरी हुई या यह ऐसे ही बना रहा तो लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालत यह है कि कोहरे की वजह से सड़क की दृश्यता में भी काफी कमी दर्ज की गई। यों दिसंबर के आखिरी दिनों और जनवरी की शुरुआत में जाड़े का मौसम अपने चरम पर होता है और अभी की स्थिति को देखते हुए लोगों को आने वाले दिनों के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए।

दरअसल, इन महीनों के दौरान तापमान में गिरावट और कड़ाके की ठंड कोई अस्वाभाविक परिस्थिति नहीं है। लेकिन जाड़े के इस तरह बढ़ने पर सामान्य जनजीवन में जैसी मुश्किलें खड़ी होती हैं, उसमें बचाव के उपायों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। जिनके पास ठंड से बचने के लिए घर सहित दूसरे तमाम संसाधन और सुविधाएं मौजूद हैं, उनके लिए यह मौसम कोई खास असुविधाजनक नहीं होता है।

मगर एक बड़ी आबादी ऐसी है, जो अभावों के बीच जीती है और उसके लिए कड़ाके की ठंड से किसी तरह बच कर निकल जाना ही एक चुनौती है। खासतौर पर दिल्ली जैसे महानगरों में भारी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं, जिनके पास कोई घर नहीं होता, जाड़े से बचने के लिए गरम कपड़े या दूसरे साधन नहीं होते और उनमें से काफी लोग न्यूनतम तापमान में भी खुले आसमान के नीचे रात काटते दिख जाते हैं।

ऐसे बेघर लोगों के लिए सरकार की ओर से रैन बसेरों का इंतजाम किया जाता है, लेकिन आमतौर पर वह या तो कामचलाऊ भर होता है या फिर जरूरत के मुकाबले काफी कम पड़ता है। हालांकि इस साल कोरोना की वजह से पैदा हुए हालात में नए लोगों का दिल्ली में आना बहुत कम हो गया है, फिर भी जितने लोग लाचारी की हालत में बेघर हैं, उनकी मदद करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।

अन्य सालों के मुकाबले इस बार ठंड में बड़ी चुनौती के रूप में कोरोना महामारी मौजूद है, जिसका सामना सरकार से लेकर आम लोग पिछले करीब नौ-दस महीने से कर रहे हैं। इस बीच किसानों का आंदोलन भी दिल्ली की सीमा पर चल रहा है, जिसमें बचाव के सीमित संसाधनों के बीच भारी तादाद में लोग खुले आसमान के नीचे हैं। फिलहाल मुश्किल यह खड़ी हो सकती है कि तापमान में गिरावट के साथ-साथ संक्रमण के खतरे भी बढ़ जाएं।

इसलिए इस साल सबसे पहली जरूरत खुद को किसी भी बीमारी से बचाने की होनी चाहिए। सरकार को स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी बाकी सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह जागरूकता अभियान चलाना चाहिए कि मौसम की मार का सामना करते हुए लोग अपने स्तर पर भी संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर सावधान रहें।