केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बब्बर खालसा के आतंकी बलवंत सिंह राजोआना को सजा-ए-मौत के फैसले को बदलकर उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। राजोआना को साल 2007 में दिग्गज कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोष में मौत की सजा सुनाई थी। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार (12 नवंबर, 2019) को केंद्र के फैसले से पंजाब सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। खास बात है कि आज प्रकाश पर्व भी है।
सूत्रों ने आगे कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन सजा में छूट के आदेश की कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा। पंजाब सरकार में एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘यह केंद्र शासित प्रदेश (UT) का मामला है और गृह मंत्रालय ने इसकी सूचना UT प्रशासन को भेज दी है। चूंकि बलवंत सिंह पंजाब की जेल में बंद थे इसलिए हमें भी इसकी जानकारी मिली है।’ उन्होंने आगे कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ सजा-ए-मौत की सजा की माफी पर आगे की कार्रवाई करेगा।
52 साल के राजोआना पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मुख्य दोषी हैं और अभी पटियाला की सेंट्रल जेल में बंद हैं। अब केंद्र की सिफारिश लागू होने के बाद उनकी मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील हो जाएगी। पंजाब पुलिस के पूर्व कांस्टेबल राजोआना को एक अगस्त, 2007 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई गई थी और 31 मार्च, 2012 को उन्हें मौत की सजा दी जानी थी।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जंयती से पहले एक अहम फैसले के तहत राजोआना की सजा माफी को छूट देने का फैसला लिया था। केंद्र के फैसले में कुल 9 सिख कैदियों की सजा में छूट देने का फैसला लिया गया।
गौरतलब है कि 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ सिविल सचिवालय के बाहर पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी गई थी। आंतकियों ने उनकी कार को बम से उड़ा दिया। इस दौरान अन्य 16 लोगों की भी मौत हो गई। पंजाब पुलिस में अधिकारी दिलावर सिंह ने इस हमले में आत्माघाती हमलावर की भूमिका निभाई जबकि राजोआना उसके साथ इस साजिश में मुख्य रूप से शामिल थे।
इस घटनाक्रम में राजोआना भी आत्मघाती भी हमलावर थे। दरअसल हमले में दिलावर के नाकाम होने पर राजोआना को सीएम पर हमला करना था। बेअंत सिंह की हत्या के पीछे राजोआना ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला दिया था।

