पूर्ववर्ती राज्य त्रिपुरा में सत्ताधारी भाजपा का विजय रथ अभी भी जारी है। दरअसल त्रिपुरा में होने वाले पंचायत उपचुनाव में भाजपा 96 प्रतिशत सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज करने जा रही है। बता दें कि त्रिपुरा में आगामी 30 सितंबर को 3207 ग्राम पंचायत सीटों, 161 पंचायत समिति सीटों और 18 जिला परिषद की सीटों पर चुनाव होने हैं। इसमें से भाजपा 3075 ग्राम पंचायत सीटों, 154 पंचायत समिति और सभी 18 जिला परिषद की सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज करेगी। इस चुनावों के लिए नामांकन करने का आखिरी तारीख 11-12 सितंबर थी। साथ ही नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 14 सितंबर थी। ऐसे में राज्य की इन 96 प्रतिशत पंचायत सीटों पर भाजपा का कब्जा तय है। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद बड़े पैमाने पर लेफ्ट पार्टी के नेताओं ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद अब इन सभी सीटों पर उप-चुनाव कराए जा रहे हैं।
पंचायत उप-चुनावों में भाजपा की इस जोरदार जीत के बाद विपक्षी पार्टी सीपीआई ने भाजपा पर उसके कैडर को धमकाने का आरोप लगाया है, जिस कारण उनके नेता नामांकन नहीं कर सके और भाजपा को एकतरफा जीत हासिल हुई। डीएनए की एक खबर के अनुसार, लेफ्ट नेताओं का कहना है कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव के हालात नहीं हैं और राज्य निर्वाचन आयोग ने भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। लेफ्ट का आरोप है कि 35 ब्लॉक में से 28 पर भाजपा ने उनके नेताओं को नामांकन ही नहीं करने दिया। हालांकि भाजपा ने लेफ्ट पार्टी के इन आरोपों को नकार दिया है।
उल्लेखनीय है कि पंचायत उपचुनावों के दौरान विधानसभा में सहयोगी पार्टीयों IPFT और भाजपा के बीच भी मतभेद देखने को मिले। इतना ही नहीं कई जगहों पर भाजपा और IPFT कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं, जिसमें 19 भाजपा, आईपीएफटी कार्यकर्ताओं समेत कुछ पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। शनिवार को भाजपा और IPFT ने एक बैठक कर अपने मतभेद दूर करने का फैसला किया है। दोनों ही पार्टियों का आरोप है कि सीपीआई दोनों पार्टियों के बीच मतभेद कराना चाहती है। लेकिन अब दोनों ही पार्टियों ने आपसी मतभेद दूर करने के लिए एक 14 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो कि दोनों पार्टियों के बीच समन्वय कायम करने का काम करेगी।

