सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को प्रोन्नति न देने का फैसला किया है। द टेलीग्राफ ने गोपनीयता की शर्त पर उच्च-पदस्थ सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। एक मुख्य न्यायाधीश का नाम इसलिए क्लियर नहीं किया गया क्योंकि उनके उच्च न्यायालय में मामलों का अच्छा-खासा बैकलॉग था, फिर भी वह छुट्टी लेकर गोल्फ खेलने चले गए थे। सूत्र ने अखबार से कहा, “ऐसा नहीं था कि वह मुख्य न्यायाधीश अकेले ही गए थे, बल्कि गोल्फ खेलने को कुछ और जज भी छुट्टी लेकर साथ गए।” वहीं, दूसरे के बारे पता लगा है कि एक उन्होंने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज को खुश करने के लिए एक लोक सेवा आयोग के खिलाफ कुछ फैसले दे दिए। एक अन्य मुख्य न्यायाधीश को इसलिए तरक्की नहीं दी जाएगी क्योंकि वह लगातार राज्य सरकार के हेलिकॉप्टर इस्तेमाल करते रहे हैं।
कॉलेजियम में भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा चार वरिष्ठतम न्यायाधीश- जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसए बोबदे, जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस अरुण मिश्रा शामिल हैं। अखबार ने सूत्र के हवाले से लिखा है, “हमें इन तीन मुख्य न्यायाधीशों के खिलाफ कुछ बातें पता चलीं थीं और उनकी रोशनी में, उन्हें सुप्रीम कोर्ट में लाने का फैसला मुश्किल हो जाता। हम तीनों मुख्य न्यायाधीशों के नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते क्योंकि इससे निरंतरता अस्थिर होगी।” अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जज इस फैसले पर एकमत हैं या नहीं। तकनीकी रूप से, अगर एक जज भी पदोन्नति का विरोध करता है तो उस पर विचार नहीं किया जाता है।
अखबार ने सूत्र के हवाले से लिखा है कि मुख्य न्यायाधीशों पर लगे यह आरोप वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर इशारा नहीं करते। इन प्रतिकूल निष्कर्षों को “न्यायिक कदाचार”, “बार-बार अनुपस्थिति” और “किसी न्यायाधीश से अपेक्षित उच्च न्यायिक मानकों” से अलग जाकर आदेश जारी करने की श्रेणी में रखा गया है।
कॉलेजियम और सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्तियों तथा ट्रांसफर के लिए गाइडलाइंस तय हैं। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को स्वत: सुप्रीम कोर्ट भेजे प्रोन्नत किए जाने का अधिकार नहीं है। परिपाटी यही रही है कि, अखिल भारतीय स्तर पर वरिष्ठता के हिसाब से उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की जाती है।

