हामिद और जैनब अकेले नहीं है, जो पूर्व विदेश मंत्री के निधन को व्यक्तिगत नुकसान मान रहे हैं। पाकिस्तान से करीब चार साल पहले भारत लौटीं मूक-बधिर गीता ने इशारों में बुधवार को कहा कि उसने अपनी अभिभावक को खो दिया है। गलती से सीमा लांघने के कारण गीता करीब 20 साल पहले पाकिस्तान पहुंच गई थी। गीता को करीब 20 साल पहले पाकिस्तान रेंजर्स ने लाहौर रेलवे स्टेशन पर समझौता एक्सप्रेस में अकेले बैठा हुआ पाया था। मूक-बधिर लड़की की उम्र उस समय कथित तौर पर सात या आठ साल की थी।
कद्दावर नेता और कुशल वक्ता होने के साथ ही सुषमा स्वराज को अपने सहज-सरल स्वभाव के लिए भी जाना जाता रहा। जब वे विदेश मंत्री थीं, उन्होंने देश-विदेश में फंसे लोगों की मदद करने के लिए प्रोटोकॉल की परवाह नहीं की। उनकी ममतामयी छवि बनी। अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे काम किए, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया। कभी पासपोर्ट में दिक्कत को हल करना तो तो कभी विदेशों में फंसे भारतीयों को छुड़ाना।
अक्सर ऐसे मामलों में सुषमा व्यक्तिगत तौर पर मदद के लिए आगे आ जाती थीं। पाकिस्तान की जेल से छूटकर आए हामिद अंसारी से लेकर सऊदी अरब में बंधक बना दी गईं जैनब-बी तक आंखों में आंसू लिए याद कर रहे हैं अपनी ‘दूसरी मां’ को। छह साल तक पाकिस्तान की जेल में बिता कर पिछले साल दिसंबर में ही भारत लौटे अंसारी नम आंखों से सुषमा स्वराज को याद करते हैं। वे कहते हैं कि अपनी ‘दूसरी मां’ से वंचित हो गए। ऑनलाइन दोस्त बनी एक लड़की से मिलने के लिए अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान गए हामिद निहाल अंसारी (36) को वहां जासूसी के आरोप में छह साल तक जेल में रहना पड़ा। उन्हें पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने सजा सुनाई थी। इस बीच मामला केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास पहुंचा, जिन्होंने पाकिस्तान के सामने इस मुद्दे को उठाया।
तमाम कोशिशों के बाद दोनों ही मुल्कों के कई लोगों ने मिलकर कोर्ट के सामने यह साबित किया कि हामिद पाकिस्तान में अवैध तरीके से जरूर दाखिल हुआ है, लेकिन वह जासूस नहीं है। हामिद कहते हैं, ‘सुषमाजी की कोशिशों से ही मैं घर लौट सका। जब मुझे वाघा-अटारी सीमा पर भारत को सौंपा गया और अपने माता-पिता से मिला, तब मेरी एक मां थी। बाद में जब सुषमा जी से मिला तो उन्होंने गले लगाया और एक मां की तरह मुझे हिम्मत दी। तब मेरे पास दो माएं हो गईं, उनमें से एक को मैंने खो दिया।’
सऊदी अरब में फंसी जैनब बी को सुरक्षित वतन वापस लाने में सुषमा स्वराज ने काफी मदद की थी। जैनब बी वहां आया का काम करने गई थीं और उन्हें बंधक बना लिया गया था। बाद में उनके परिजनों की गुहार पर विदेश मंत्रालय ने छुड़वाया। सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुन कर जैनब भावुक हो गईं। रोते हुए उन्होंने कहा, ‘मेरी मैडम ने बहुत मदद की थी। मैंने जब से यह खबर सुनी है, मुझे नींद नहीं आई। बहुत मदद की थी मैडम ने। सुषमा मैडम को जन्नत में जगह मिले।’हामिद और जैनब अकेले नहीं है, जो पूर्व विदेश मंत्री के निधन को अपना व्यक्तिगत नुकसान मान रहे हैं। पाकिस्तान से करीब चार साल पहले भारत लौटीं मूक-बधिर गीता ने इशारों में बुधवार को कहा कि उसने अपनी अभिभावक को खो दिया है। गलती से सीमा लांघने के कारण गीता करीब 20 साल पहले पाकिस्तान पहुंच गई थी।
गीता को करीब 20 साल पहले पाकिस्तान रेंजर्स ने लाहौर रेलवे स्टेशन पर समझौता एक्सप्रेस में अकेले बैठा हुआ पाया था। मूक-बधिर लड़की की उम्र उस समय कथित तौर पर सात या आठ साल की थी। भारत वापसी से पहले वह कराची के परमार्थ संगठन ईदी फाउंडेशन के आश्रय स्थल में रही थी। स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण ही वह 26 अक्तूबर 2015 को स्वदेश लौट सकी थी।
[bc_video video_id=”6069046756001″ account_id=”5798671092001″ player_id=”JZkm7IO4g3″ embed=”in-page” padding_top=”56%” autoplay=”” min_width=”0px” max_width=”640px” width=”100%” height=”100%”]
इसी तरह उत्तर प्रदेश के वाराणसी की कंचन भारद्वाज भी हैं। तीन साल पहले कंचन के नाइजीरिया में तैनात इंजीनियर पति संतोष भारद्वाज का समुद्री डाकुओं ने अपहरण कर लिया था। कंचन को उस वक्त कोई उम्मीद नहीं थी और निराशा में उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। तब कंचन ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट कर व्यथा बताई थी। कंचन के ट्वीट पर जवाब देते हुए सुषमा ने ढांढस बंधाते हुए लिखा, ‘बहन आप खाना नहीं छोड़ें। मैं आपके पति को छुड़वाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी।’ सुषमा स्वराज ने संतोष की स्वदेश वापसी कराई।
बांग्लादेश से सोनू की भी सुरक्षित घर वापसी संभव हो पाई थी सुषमा स्वराज के कारण। एक महिला ने छह साल पहले दिल्ली के सीमापुरी से सोनू का अपहरण लिया था। वह उसे बांग्लादेश के जैसोर लेकर चली गई थी। वहां शेल्टर होम में रह रहे सोनू ने जमाल इब्नमूसा नाम के शख्स को अपने ऊपर हुए जुल्म की दास्तां बयां की तो उन्होंने सोनू को भारत पहुंचाने का जिम्मा उठा लिया। विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा को जब इसकी सूचना मिली तो उन्होंने उसकी सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित कराई।
केंद्र की मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेशों में मुश्किल में फंसे भारतीयों की मदद के लिए सुषमा स्वराज काफी मशहूर हुई थीं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं और लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के लिए जानी जाती थीं। एक बार सुषमा ने यहां तक कहा कि यदि आप मंगल ग्रह पर भी फंस गए हैं तो वहां भारतीय दूतावास आपकी मदद करेगा।
