सरकार का टीबी उन्मूलन लक्ष्य दम तोड़ता दिख रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक तपेदिक (Tuberculosis) को देश से खत्म करने का लक्ष्य रखा था। चालू वर्ष के बीतने में बस एक माह शेष है, लेकिन हालात यह हैं कि टीबी के मरीज बढ़ गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले पांच वर्षों में तपेदिक रोगियों की संख्या में डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2020 में जहां टीबी रोगियों की संख्या 18,05,670 थी, वहीं 2024 में इस संक्रामक रोग से प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़कर 26,17,923 हो गई। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत भारत ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, जो दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य मिशनों में से एक माना जाता है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर एक आवेदन के जवाब में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय क्षय रोग प्रभाग ने यह जानकारी उपलब्ध कराई है।

टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह रोग मुख्य रूप से रोगी के फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंग जैसे गुर्दे, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। केंद्रीय क्षय रोग प्रभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल अक्टूबर तक टीबी के कुल मामलों की संख्या 20,77,591 तक पहुंच चुकी है।

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आरटीआई के मुताबिक, 2020 में 18,05,670, 2021 में 21,35,830, 2022 में 24,22,121, 2023 में 25,52,257 और 2024 में 26,17,923 मामले सामने आए। ये आंकड़े टीबी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के परिचायक हैं। प्रति एक लाख आबादी पर टीबी के मामलों की दर 2020 में 131, 2021 में 153, 2022 में 172, 2023 में 179, 2024 में 183 और 2025 में 195 तक पहुंच गई।

आरटीआई के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश टीबी से सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जहां जून 2025 तक 3,83,987 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जबकि 2024 में 6,81,779, 2023 में 6,32,872, 2022 में 5,22,850, 2021 में 4,53,712 और 2020 में 3,66,641 मामले सामने आए थे। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जून 2025 तक 62,342 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले चार वर्षों में यह आंकड़ा एक लाख से अधिक था। दिल्ली में 2024 में 1,05,343, 2023 में 1,00,523, 2022 में 1,06,731, 2021 में 1,03,038 और 2020 में 86,842 मामले सामने आए थे।

आरटीआई के अनुसार महाराष्ट्र में भी टीबी रोगियों की संख्या पिछले पांच वर्षों में कभी डेढ़ लाख से कम नहीं रही। महाराष्ट्र में जून 2025 तक 1,15,303, 2024 में 2,30,163, 2023 में 2,27,664, 2022 में 2,34,105, 2021 में 1,99,976 और 2020 में 1,59,663 मामले सामने आए थे।

उपलब्ध सूचना के अनुसार, टीबी से सबसे कम प्रभावित क्षेत्रों में लक्षद्वीप सबसे आगे है, जहां जून 2025 तक सिर्फ नौ मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित ‘पल्मनोलॉजी रीजेंसी हॉस्पिटल’ के कंसल्टेंट डॉ. आमिर नदीम ने एजेंसी को बताया, “टीबी की समय पर पहचान और उपचार न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। टीबी पूरी तरह ठीक की जा सकती है, बशर्ते मरीज नियमित उपचार करे और बीच में दवाइयां न छोड़े।” सरकार की ‘निक्षय पोषण योजना’, मुफ्त दवा और इलाज की सुविधाओं ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।