लद्दाख के मशहूर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत पर 8 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई। इस दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके पति के भाषण का मकसद हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि उसे खत्म कराना था। गीतांजलि ने कहा कि उन्हें अपराधी दिखाने के लिए तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।

सोनम वांगचुक की पत्नी का बड़ा आरोप

गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि सोनम वांगचुक को उनकी हिरासत के पूरे आधार नहीं बताए गए और उन्हें हिरासत के खिलाफ संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का सही मौका नहीं दिया गया। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई और 12 जनवरी को जारी रहेगी।

लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। इस विरोध प्रदर्शनो में केंद्र शासित प्रदेश में चार लोग मारे गए और 90 अन्य घायल हो गए थे। सरकार ने सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। NSA केंद्र और राज्यों को व्यक्तियों को ऐसे काम करने से रोकने के लिए हिरासत में लेने का अधिकार देता है जो ‘देश की रक्षा के लिए हानिकारक’ हों। इसकी अधिकतम हिरासत की अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी वापस लिया जा सकता है।

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कपिल सिब्बल ने क्या कहा?

गीतांजलि की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ को बताया कि सोनम वांगचुक को प्रशासन ने हानिकारक गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया था। सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक के भाषण का वीडियो चलाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट ने भूख हड़ताल खत्म करते समय यह भाषण दिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, “मैंने कहा कि मैं इस हिंसा को स्वीकार नहीं कर सकता और हमें इस हिंसा को रोकना चाहिए और मैं आपसे इस हिंसा को रोकने की अपील कर रहा हूं। यही वह वीडियो था जो मैं आपके सामने चलाना चाहता था। आपको याद होगा कि चौरी-चौरा घटना के बाद जब हिंसा हुई थी, तो गांधीजी ने भी ऐसा ही किया था।”

कपिल सिब्बल ने साथ ही यह भी कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है ताकि सोनम वांगचुक को अपराधी दिखाया जा सके। कपिल सिब्बल ने कहा, “भाषण का लहजा किसी भी तरह से राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है या यह नहीं है कि मैं ऐसी गतिविधियां जारी रखूंगा या हिंसा फैलाऊंगा, बल्कि इसे शांत करने के लिए है। जरूरी वीडियो जो प्रशासन के पास था, उसे हिरासत में लेने वाले अधिकारियों के समक्ष पेश नही किया गया। इसका मकसद यह था कि 24 सितंबर 2025 को असल में क्या हुआ था, इसकी जानकारी के बिना ही हिरासत का निर्देश जारी कर दिया जाए।”

कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि चार वीडियो को छोड़कर बाकी सभी दस्तावेज वाली पेन ड्राइव 29 सितंबर 2025 को दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया, “26 सितंबर, 2025 को हिरासत के आदेश के पीछे के मुख्य कारण वे चार वीडियो थे जिन पर हिरासत में लेने वाले अधिकारी ने भरोसा किया था। ये वीडियो 10 सितंबर, 11 सितंबर और दो वीडियो 24 सितंबर के थे। हालांकि, जब 29 सितंबर को हिरासत के कारण बताए गए, तो वे चार वीडियो हिरासत में लिए गए व्यक्ति को नहीं दिए गए।”