सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को होने वाली अखिल भारतीय प्री मेडिकल प्रवेश परीक्षा में मुसलिम लड़कियों को अपनी पारंपरिक धार्मिक पोशाक ‘हिजाब’ पहने की अनुमति के लिए दायर याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। यह याचिका एक इस्लामी संगठन ने दायर की थी। प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा- आस्था कुछ किस्म के परिधान पहनने से भिन्न होती है। अदालत ने कहा कि यह परीक्षा उसके ही निर्देश पर फिर से हो रही है और इसमें उचित प्रतिबंध जरूरी हैं।
स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने यह जनहित याचिका दायर की थी। इस संगठन की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस परीक्षा में प्रवेश के लिए ड्रेस कोर्ड अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि लड़कियों के लिए हिजाब नहीं पहनने के अलावा उसके सारे निर्देश स्वीकार्य हैं। उनका कहना था कि हिजाब पहनना उनके धर्म का अनिवार्य आचरण है और ऐसी स्थिति में लड़कियां ये परीक्षा छोड़ने के लिए बाध्य होंगी।
इस पर जजों ने टिप्पणी की कि क्या तर्क दिया जा रहा है। एक दिन हिजाब नहीं पहनने से धर्म नहीं बिगड़ जाएगा। इसे सिर्फ अहम का मुद्दा बनाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने अखिल भारतीय प्री मेडिकल परीक्षा में अनियमितताओं के कारण ग्रीष्मावकाश के दौरान 15 जून को इसे निरस्त करके नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने का निर्देश केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को दिया था।
जजों का रुख देखते हुए हेगड़े ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने दो मुसलिम लड़कियों को हिजाब पहनकर परीक्षा देने की सशर्त अनुमति प्रदान की थी। लेकिन हाई कोर्ट ने एआइपीएमटी की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए सीबीएसई के ड्रेस कोड में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

