सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मनुष्यों पर हमले बढ़ रहे हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस नाथ, मेहता और एनवी अंजारी की तीन-न्यायाधीशों वाली विशेष पीठ द्वारा की गयी। इस दौरान अदालत ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं और एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले में दायर किए जा रहे अंतरिम आवेदनों की अधिक संख्या पर ध्यान दिया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मानव मामलों में भी इतनी संख्या में आवेदन नहीं देखे जाते।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई शुरू करते हुए कहा, “आज हम सबको समय देंगे। किसी को शिकायत न रहे कि उसे नहीं सुना गया। पहले पीड़ितों को सुनेंगे, फिर डॉग लवर्स को।” कोर्ट ने कहा कि सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज दुर्घटना का शिकार हुए हैं।
इलाज से बेहतर रोकथाम- सुप्रीम कोर्ट
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने वरिष्ठ वकील कपिल सिबल को एनएलएसआईयू बेंगलुरु की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि मनुष्यों पर हमले बढ़ रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने कहा कि कोई भी जानवर के मन की बात नहीं जान सकता कि वह कब काटने के मूड में है या नहीं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि इलाज से बेहतर रोकथाम है। इस दौरान जस्टिस ने कहा, “सड़कें कुत्तों से मुक्त और साफ होनी चाहिए। वे भले ही काटते न हों, लेकिन फिर भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। हमें सड़कों, स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों की क्या आवश्यकता है?”
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर CAQM को लगाई फटकार
इंसानों से जुड़े मामलों में भी आमतौर पर इतनी अधिक संख्या में याचिकाएं नहीं आतीं- SC
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष दो वकीलों ने उनके द्वारा दायर अंतरिम आवेदन का उल्लेख किया। इस पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा, “मानव मामलों में इतने सारे आवेदन सामान्यतः आते ही नहीं हैं।” वकीलों द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई के अनुरोध का जवाब देते हुए, अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर उसी दिन सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने यह भी आश्वासन दिया कि पीठ सभी वकीलों की बात सुनेगी।
आवरा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों के आसपास कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 7 नवंबर को आवारा कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस प्रकार पकड़े गए आवारा कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। न्यायालय ने अधिकारियों को राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा कि खेल परिसरों सहित संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाओं का बढ़ना न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है बल्कि इन परिसरों को रोके जा सकने वाले खतरों से सुरक्षित करने में विफलता को भी उजागर करती है। न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे। यह न्यायालय राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में रेबीज फैलने की मीडिया रपट के संबंध में पिछले साल 28 जुलाई को शुरू किए गए स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।
