सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात काडर के आइपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की सीबीआइ के विशेष निदेशक पद पर नियुक्ति को सही ठहराने वाले शीर्ष अदालत के निर्णय पर फिर से विचार के लिए दायर उपचारात्मक याचिका खाारिज कर दी है। राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाले गैर सरकारी संगठन कामन काज ने ही यह उपचारात्मक याचिका दायर की थी। इस संगठन की पुनर्विचार याचिका अदालत पहले खारिज कर चुकी थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एएम सप्रे के पीठ ने कामन काज की उपचारात्मक याचिका 11 दिसंबर को ही खारिज कर दी थी। पर यह आदेश अदालत की वेबसाइट पर शुक्रवार को उपलब्ध कराया गया। इस पीठ ने चैंबर में उपचारात्मक याचिका पर विचार के बाद अपने आदेश में कहा-हमने उपचारात्मक याचिका और संबद्ध कागजात का अवलोकन किया। हमारी राय में उपचारात्मक याचिका के लिए इस अदालत द्वारा प्रतिपादित मानदंड के तहत इसमें कोई मामला नहीं बनता है। उपचारात्मक याचिकाओं पर वकीलों की अनुपस्थिति में जजों के चैंबर में विचार किया जाता है।
शीर्ष अदालत का यह निर्णय राकेश अस्थाना और सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा के बीच छिड़ी जंग के बीच आया है। केंद्र सरकार ने 23 अक्तूबर को दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेज दिया था। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 28 नवंबर, 2017 को सीबीआइ के विशेष निदेशक के पद पर अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली कामन काज की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि चयन समिति द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए फैसले पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और यह फैसला गैरकानूनी नहीं है।
कामन काज ने अपनी याचिका में अस्थाना की नियुक्ति को गैरकानूनी बताते हुए कहा था कि स्टर्लिंग बायोटेक कंपनी के कार्यालय और दूसरे परिसरों पर आयकर विभाग के छापे में मिली डायरी में उनका नाम सामने आया है। दूसरी ओर केंद्र ने कहा था कि अस्थाना, जो पहले जांच ब्यूरो में अतिरिक्त निदेशक थे, ने अगस्ता वेस्टलैंड, एंबुलेंस घोटाला, किंगफिशर घोटाला, हसन अली खान, मोईन कुरैशी और कोयला खदान आबंटन घोटाला सहित नेक मामलों की जांच की निगरानी की है। केंद्र का कहना था कि सीबीआइ निदेशक के पत्र में दिए गए विवरण को स्वीकार नहीं करने के बारे में चयन समिति ने वजह बताते हुए अस्थाना को जांच ब्यूरो का विशेष निदेशक नियुक्त करने की सिफारिश की थी।

