पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले के बाद से देश भर के कई शहरों में कथित रूप से कश्मीरी छात्रों के साथ मारपीट की खबरें आ रही हैं। पूरे देश से कश्मीरी छात्र वापस अपने घर लौट रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से कश्मीरी छात्रों को सुरक्षा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 11 राज्यों के मुख्य सचिवों और DGP को पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीरियों के ऊपर देश के अन्य हिस्सों में हो रहे हमले और सामाजिक बहिष्कार की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इन हमलों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता तारिक अदीब ने याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्विज ने दावा किया कि यह याचिका दायर करने के बाद विभिन्न राज्यों में इस तरह के हमलों की दस से अधिक घटनायें हो चुकी हैं और इसलिए इन पर प्रभावी तरीके से अंकुश पाने के लिये तत्काल निर्देश देने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, मेघालय, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ ही दिल्ली के पुलिस आयुक्त को कश्मीरी छात्रों सहित कश्मीरियों को धमकी देने, उनसे मारपीट करने और उनका सामाजिक बहिष्कार करने की घटनाओं की रोकथाम के लिये कार्रवाई का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने नोडल अफसरों को निर्देश दिया कि वे कश्मीरियों पर हो रहे हमले की घटनाओं को रोकने का पूरा बंदोबस्त कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। इतना ही नहीं कोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि वे इन नोडल अफसरों के नामों को प्रचारित करें ताकि हमले या सामाजिक बहिष्कार की धमकियां झेल रहे कश्मीरी छात्र उनसे संपर्क कर सकें।
कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन पुलिस अधिकारियों को भीड़ द्वारा लोगों की पीट पीट कर की गई हत्या के मामलों से निपटने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था, वे अब कश्मीरी छात्रों पर कथित हमलों के मामलों को देखेंगे। कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्य इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति करें। इसी के साथ अगर कहीं भी कश्मीरी छात्रों के साथ गलत व्यवहार हो रहा है या फिर मारपीट जैसी घटनाएं हो रही हैं तो वहां पर तुरंत पुलिस की मौजूदगी तय की जाए।

